अच्छी खबर : जल्द ही सभी को मुफ्त में इलाज ,राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति को मंजूरी

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नईदिल्ली  : मोदी सरकार अब जल्द ही सभी को मुफ्त में इलाज देने की तैयारी में है. केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति को मंजूरी दे दी है. इस पर पिछले दो सालों से विचार चल रहा था.
रिपोर्ट के मुताबिक इस ड्राफ्ट में पीएम मोदी के निर्देश बाज कुछ बदलाव करते हुए मंजूरी दी गई है. इस पॉलिसी देश में सभी को निश्चित स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने का प्रस्ताव है.

क्या हैं खास बातें

  • नेशनल हेल्थ पॉलिसी के अंतर्गत कोई भी हॉस्पिटल किसी भी तरह के इलाज के लिए मरीजों को मना नहीं करेगा. इसमें प्राइवेट सेक्टर के हॉस्पिटल भी शामिल हैं.
  • इसमें लोगों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस दिए जाएंगे और इसके लिए लोगों पर हेल्थ टैक्स लगाने का भी प्रावधान है.
  • गरीबी रेखा से नीचे आने वाले लोगों का इलाज मुफ्त में किए जाने का प्रावधान है.
  • पॉलिसी के तहत टेस्ट, मेडिसिन और ट्रीटमेंट तीनों चीजें शामिल हैं.
  • इस पॉलिसी के जरिए सरकार हर किसी का फ्री में इलाज करवाने की तैयारी में है. गवर्मन्ट का टारगेट है कि देश के 80% लोगों का इलाज गवर्मन्ट अस्पातल में पूरी तरह से फ्री हो.
  • सरकारी योजनाओं के तहत एक्सपर्ट और टॉप लेवल ट्रीटमेंट में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को बढ़ाया जाएगा. यानि सरकार बेसिक ट्रीटमेंट को स्ट्रांग बनाएगी वहीं एक्सपर्ट ट्रीटमेंट के लिए लोग प्राइवेट या गवर्मन्ट हॉस्पिटल जा सकेंगे.
  • हेल्थ इंश्यारेंस प्लान के तहत सरकार प्राइवेट हॉस्पिटल्स को ऐसे इलाज के लिए निश्चित पेमेंट करेगी.
  • अब तक पीएचसी टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं और बच्चे की जांच जैसी सुविधाओं को उपलब्ध करवाता था लेकिन अब इसमें गैर-संक्रामक रोगों की जांच और कई अन्य पहलू भी शामिल होंगे.
  • डिस्ट्रिक हॉस्पिटल्स और अन्य हॉस्पिटल्स से गवर्मन्ट कंट्रोल हटाया जाएगा. साथ ही इन हॉस्पिटल्स को आधुनिक बनाएं जाने की बात भी कहीं जा रही है.
  • हेल्थ पॉलिसी में हेल्थ सेक्टर में 100% एफडीआई और डायरेक्ट टैक्स को कम करने की बात भी है.
  • हेल्थ सेक्टर में डिजिटलाइजेशन पर भी फोकस किया जाएगा. गंभीर और प्रमुख बीमारियों को जड़ से खत्‍म करने के लिए समय सीमा होगी तय.
  • इसमें मां और शिशु मृत्युदर घटाने से लेकर गवर्मन्ट हॉस्पिटल्स में मेडिसिन, टेस्ट सभी के लिए साधन मौजूद होंगे.
  • राज्यों के लिए इस नीति को मानना अनिवार्य नहीं होगा. इस पॉलिसी को एक मॉडल के रूप में राज्यों को दे दिया जाएगा. राज्य सरकार इसे लागू करती है या नहीं, ये पूरी तरह उनपर निर्भर करेगा.