आर्यिका श्री 105 ज्ञानमती माताजी का हुआ भव्य मंगल प्रवेश

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देवास। दिगंबर जैन समाज की सर्वश्रेष्ठ गणिनी आर्यिका 105 ज्ञानमती माताजी  का मंगल प्रवेश शनिवार को देवास दिगंबर जैन समाज  द्वारा स्थानीय मंडी धर्मशाला से  करवाया गया। माता जी का मंगल विहार मांगीतुंगी महाराष्ट्र से अयोध्या उत्तर प्रदेश के लिए चल रहा है, इसी कड़ी में शनिवार 8 दिसम्बर को प्रात: देवास में भव्य मंगल प्रवेश हुआ ।उक्त मंगल प्रवेश में समाज के सभी महानुभाव उपस्थित हुए, मंगल प्रवेश में महिलाएं अपने सर पर मंगल कलश लेकर एवं गरबा नृत्य करती हुई चल रही थी। मंगल जुलूस प्रात: 10 बजे स्थानीय मंडी धर्मशाला से पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर कवि कालिदास मार्ग होता हुआ दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति सदन नयापुरा पहुंचा, जहां पर माता जी की प्रात: की चर्या संपन्न हुई एवं उसके पश्चात दोपहर 2 बजे से प्रवचन हुए। राष्ट्र पर संकट आने पर सभी मतभेदों को छोडक़र एक हो जाना ही हमारी संस्कृति की विशेषता आर्यिका श्री 105 ज्ञानमती माताजी ने समाज जनों को समझाते हुए कहा कि हमारे बीच कितने भी मतभेद हो लेकिन भारतीय संस्कृति की यह विशेषता है कि जब राष्ट्र पर कोई संकट या आपदा आती है तो सभी लोग अपने मतभेद और मनभेद को छोडक़र एकजुट हो जाते हैं, एवं  आर्यिका चंदनामती माताजी ने अपने उद्बोधन में समाज जनों को समझाते हुए कहा कि 450 से अधिक ग्रंथों व पूजाओं की रचना करने वाली आर्यिका ज्ञानमती माताजी के वंदन मात्र से ही सभी का कल्याण हो  जाते हैं,आर्यिका ज्ञानमती माताजी, आर्यिका चंदना मति माताजी, स्वस्ति भूषण रविंद्र कीर्ति जी  एवं समस्त  आर्यिका संघ को श्रीफल समस्त दिगंबर जैन समाज द्वारा चढ़ाया गया , माताजी का विहार संध्या 4:00 बजे देवास से पुष्पगिरी की ओर हुआ।