दो दिवसीय राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव शुरू

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केन्द्रीय मंत्री ने किया उद्घाटन

 

ग्वालियर । फाल्‍गुन मास के बसंती मौसम की खुशनुमा सांध्य बेला  में जब मूर्धन्य कला साधकों ने राग-रागनियाँ बिखेरीं तो एक बारगी ऐसा लगा कि ऐतिहासिक ग्वालियर दुर्ग की प्राचीरों से मीठे-मीठे सुरों के झरने फूट पड़े हैं। ब्रम्हनाद के मूर्धन्य साधकों ने अपने गायन-वादन से मानमंदिर प्रांगण से सुर सरिता बहाई तो पूर्वोत्तर राज्यों से आए लोक कलाकारों ने लोक रंग की जमकर बारिश की। यहाँ बात हो रही है ग्वालियर किले पर आयोजित हो रहे दो दिवसीय राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव की।
शनिवार की शाम केन्द्रीय पंचायती राज व ग्रामीण विकास मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर एवं अन्य अतिथियों ने ग्वालियर दुर्ग स्थित मान मंदिर के समीप बने भव्य एवं आकर्षक मंच पर दीप प्रज्ज्वलन कर और नगाड़ा बजाकर महोत्सव का उदघाटन किया। प्रदेश की नगरीय विकास एवं आवास मंत्री माया सिंह, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, महापौर विवेक नारायण शेजवलकर, जीडीए अध्यक्ष अभय चौधरी व साडा अध्यक्ष राकेश सिंह जादौन एवं भाजपा जिला अध्यक्ष देवेश शर्मा की गरिमामय उपस्थिति में राष्ट्रीय संस्कृति उत्सव का उदघाटन हुआ। इस अवसर पर भारत सरकार के संस्कृति विभाग के सचिव राघवेन्द्र सिंह एवं संयुक्त सचिव प्रणव खुल्लर, कलेक्टर राहुल जैन व पुलिस अधीक्षक डॉ. आशीष मंचासीन थे।
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा ” एक भारत श्रेष्ठ भारत” के तहत इस समारोह का आयोजन किया गया है। नागालैंड, मणिपुर एवं अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के लोक संगीत और नृत्य की प्रस्तुति भी हो रही है। साथ ही क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्रों और राज्य सरकारों के सहयोग से हस्तकला एवं हस्तशिल्प उत्सव का आयोजन भी हो रहा है। पूर्वोत्तर राज्यों के लज़ीज़ व्यंजन रसिकों को लुभा रहे हैं।

खेलन आए होली कन्हाई…….
सुप्रसिद्ध दरभंगा सांगीतिक घराने के मलिक बंधु प्रशांत मलिक – निशांत मलिक ने जब राग जोग में धमार “खेलन आए होली कन्हाई” प्रस्तुत की तो फागुनी रंग बिखर गए। उन्होंने राग चारूकेसी सूल ताल में बंदिश “सुर नर मुनि सब फसे” सुनाकर अपने गायन का समापन किया। उनके साथ पखावज पर सुप्रसिद्ध पखावज वादक पं. अखिलेश गुंदेचा ने नफासत भरी संगत की।

देश की सतरंगी लोक संस्कृति हुई जीवंत
एक भारत – श्रेष्ठ भारत के तहत भारत के विविध सांस्कृतिक विरासत के इस उत्सव में शनिवार की सांध्य बेला में मणिपुर का सुप्रसिद्ध “तुंग चोलम” व थांगरा नृत्य प्रस्तुति ने रसिकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसी कड़ी में उत्तरप्रदेश का डेडिया नृत्य, उड़ीसा का थारू, मध्यप्रदेश का बरधा, असम का बिहू, कश्मीर का सफ और पंजाब का भांगड़ा नृत्य ने भी रसिकों को खूब रिझाया। सतरंगी रोशनी में नहाए मान मंदिर और किला की अन्य ऐतिहासिक इमारतों के बीच सजी इस महफिल में कला रसिक देर रात तक गोते लगाते रहे।

आज इनकी होगी प्रस्तुति
ध्रुपद केन्द्र ग्वालियर – प्रार्थना, युवा कलाकार सुमीत आनंद – गौहर वाणी व ध्रुपद परंपरा, यखलेश बघेल एवं अनुज प्रताप सिंह – ध्रुपद जुगलबंदी तथा उस्ताद बहाउद्दीन डागर – रूद्र वीणा ।