नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा पर एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न

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स्कूलों में शिक्षा के साथ-साथ व्यवहारिक शिक्षा भी उपलब्ध कराए जाने पर जोर

 

ग्वालियर । नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन सोमवार को होटल तानसेन रेसीडेंसी में किया गया। कार्यशाला में मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष राघवेन्द्र शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष मनीषा भुजवल सिंह यादव, कलेक्टर राहुल जैन, बाल शिक्षा के संचालक डॉ. के के दीक्षित, नगर निगम शिक्षा समिति के प्रभारी सतीश बोहरे, जिला शिक्षा अधिकारी नीखरा सहित शिक्षक एवं बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत कार्य कर रहे विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित थे।
कार्यशाला के उदघाटन सत्र में मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष राघवेन्द्र शर्मा ने कहा कि नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा के लिये सरकार ने कई नियम कानून बनाए हैं। उन्होंने कहा कि केवल नियम और कानून से ही शिक्षा का अधिकार प्राप्त नहीं हो सकता है। इसके लिये समाज की भागीदारी आवश्यक है , शर्मा ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलतायें मिली हैं। हमारी साक्षारता दर भी बढ़ी है। परंतु अभी भी नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि शतप्रतिशत बच्चों को शिक्षा प्राप्त हो, इसके लिये शिक्षा विभाग के साथ-साथ समाज के सभी वर्गों को आगे आकर कार्य करने की आवश्यकता है। स्कूल में शिक्षा का बेहतर माहौल बनाने में शिक्षा विभाग के शिक्षकों की महती भूमिका है। इसके साथ ही समाज का सहयोग भी अपेक्षित है।
कलेक्टर राहुल जैन ने कहा कि सरकार ने नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिनियम बनाया है। इसके तहत सभी को शिक्षा का अधिकार प्राप्त है। प्रदेश सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये अनेक कार्यक्रम भी संचालित कर रही है। शिक्षा से समाज को जोड़ने का कार्य भी सरकार ने किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा प्रेरणा संवाद, मिल बाचें मध्यप्रदेश जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और समाज के गणमान्य नागरिकों को शाला से जोड़ने का कार्य किया है।
कलेक्टर राहुल जैन ने कहा कि शिक्षकों का भी दायित्व है कि वे अपने स्कूल का माहौल ऐसा बनायें कि अधिक से अधिक बच्चे शिक्षा ग्रहण करने हेतु प्रेरित हों। स्कूल में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक भी सहयोग करें, इसके लिये शिक्षकों को प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को चाहिए कि बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान भी प्राप्त हो। शिक्षक को रूचि कर बनाने पर भी उन्होंने जोर दिया।