भारतीय शिक्षा प्रणाली की विडंबना

0
79
  • भारतीय शिक्षा प्रणाली की विडंबना

“और सिर्फ इसलिए कि आपके पास स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी हैं इसका मतलब यह नहीं है कि आपके पास शिक्षा है”

1.25 अरब की जनसंख्या वाला भारत दूसरा सबसे बड़ा देश है, जो दुनिया की सबसे पुरानी शिक्षा प्रणाली है और 20-27 की औसत आयु के साथ दुनिया का सबसे छोटा देश है। लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में इतनी अच्छी रैंकिंग के साथ भी वह क्या चीज है जो हमें अभी भी वर्ल्ड लीडर बनने से रोक रही है? 21 वीं शताब्दी में भारत अभी भी एक विकासशील देश क्यों है?

शिक्षा एक ऐसा उपकरण है जो हमें जीवन कौशल, व्यावहारिक दृष्टिकोण और हमारे ज्ञान में सुधार के बारे में सिखाता है, लेकिन अभी भारत में शैक्षणिक प्रणाली केवल याद रखने और सीखने के आधार पर आधारित है, छात्रों का आंकलन उनके अकादमिक ग्रेड या प्रतिशत के आधार पर किया जाता है, वोकेशनल एजुकेशन को कोई महत्व नहीं दिया जाता है जिसके कारण पारंपरिक शिक्षा प्रणाली में प्रोफेशनल आउटलुक की कमी होती है। स्कूल और कॉलेज केवल बिजनेस हाउस बन गए हैं जो छात्रों को सशक्त बनाने और समाज के मूल्यवान नागरिक बनाने के उद्देश्य को पूरा करने में विफल रहता है।

भारतीय ब्यूरोक्रेटिक प्रणाली की तरह भारतीय शिक्षा प्रणाली विक्टोरियन है और अभी भी 19वीं शताब्दी में है। हमारे शैक्षणिक संस्थान अभी भी एक साम्राज्य के लिए क्लर्क बनाने के लिए डिज़ाइनड किए गए हैं जो अब मौजूद ही नहीं हैं। यह मुख्य रूप से अंग्रेजों द्वारा निर्धारित प्रणाली का पालन करता है। शिक्षा किसी भी देश के विकास की नींव है, हमें बढ़ती और बदलती दुनिया के साथ वर्ल्ड लीडर बनने के लिए हमारी शिक्षा प्रणाली को बदलने की आवश्यकता है, हमारे पास हमारे संसाधन हैं जरूरत है तो बस परिप्रेक्ष्य में बदलाव की |

अंजलि थपलियाल
लेखिका , विचारिक
नवसंवाद & व्यूज पॉइंट