मतगणना विशेष’ आखिर ‘मंगल’ किसका करेगा मंगल और अमंगल?

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‘मतगणना विशेष’

आखिर ‘मंगल’ किसका करेगा मंगल और अमंगल?

श्रीगोपाल गुप्ता

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की मतगणना के दिन 11 दिसंबर को पढ़ने वाला ‘मंगलवार’ आखिर किसका करेगा मंगल और किसके लिए साबित होगा अमंगल? ये सवाल हाल ही में सपन्न हुये पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के मतदान होने के साथ ही हर किसी के सामने चुनौती देते हुये खड़ा है। इसके साथ ही राजस्थान और तेलंगाना विधानसभा के अंतिम चरण के मतदान 7 दिसंबर के बाद पांच बजे के बाद देश को विभिन्न टीवी चैनलों द्वारा दिखाये ‘एग्जिट पोल्स’ ने जहां आम आदमी के मानस में न्ई सरकारों को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी तो विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के चेहरे पर शिकन भी बढ़ा दी है। मगर मतदान के दिन अपने-अपने मतों का उत्साह और बेहतर उपयोग कर पांच राज्यों की जनता जनार्दन ने अपना फैसला कर सुरक्षित रख दिया था, जिसका मंगलवार को सुनाने का समय आ गया है। सारी अटकलें और कयासों को आज विराम लग जायेगा और यह भी तय हो जायेगा कि ‘मंगल’ किस राजनीतिक दल के लिये मंगल लेकर आया और किसके हिस्से में अमंगल साबित हुआ। मगर ये सच है कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी पार्टी भाजपा के सामने इन राज्यों में फतह करना अपना जादू और जनता में विश्वास बनाये रखना है, तो कांग्रेस और उसके मुखिया राहुल गांधी के लिए किले फतह करना अगले वर्ष लोकसभा चुनाव जीतने की नींव रखना है।यदि दो राज्यों मिजोरम और तेलंगाना को छोड़ दिया जाये, जहां भारतीय जनता पार्टी व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा प्रमुख अमित शाह का बहुत कुछ वहां नहीं है।तो मप्र., राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बहुत कुछ है।मप्र और छत्तीसगढ़ में जहां उसका निजाम 15 वर्ष पुराना है गढ़ है जबकि राजस्थान में भी उसकी सरकार है। ऐसे में उसके सामने अपनी सत्ता बचाने बचाये रखने की महत्ती चुनौती है। यह सच है कि यह चुनाव केन्द्र की भाजपा सरकार के लिए बहुत ज्यादा उलेटफेर भरे नहीं होंगे क्योंकि इन चुनाव से सरकार का कुछ भी बिगड़ने का कोई डर नहीं है।मगर इन चुनावों को हारने का मतलब होगा सन् 2014 में और उसके बाद भी देश में चली नरेन्द्र मोदी की लहर बल्कि सुनामी कहीं न कम थमती नजर आयेगी और इसका असर अगले वर्ष अप्रैल-मई 2019 में होने वाले देश के आम चुनाव में पढ़ना तय सा ही है। क्योंकि ये किसी से छुपा नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा प्रमुख अमित शाह और स्टार प्रचारक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित भाजपा ने पूरी दम लगाकर इस को पूरी प्रतिष्ठा के साथ लड़ा है।

इधर अपने सबसे ज्यादा दुर्दिनों से रुबरु कांग्रेस के लिये भी न केवल मप्र., छत्तीसगढ़, राजस्थान और तेलंगाना में सरकार बनाने की चुनौती है बल्कि देश के सबसे छोटे राज्य मिजोरम में अपनी 10 वर्ष पुरानी सरकार को भी बचाये रखने की भी जिम्बेदारी है। और इसके लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बड़ी सूझबूझ और चतुराई के साथ स्वयं मोर्चा संभाला। हालांकि बीच-बीच में वे कुछ डगमगाये भी मगर अतंतः उन्होने अपने आपको सभांल लिया, मगर कितना संभाला? ये तो मंगल को घोषित होने वाले चुनाव परिणाम ही बता सकते हैं। मगर ये लगभग सच है कि जहां उन्हें मप्र.,राजस्थान, छत्तीसगढ़ में भाजपा की 15 वर्षों की एंटीकम्बैंसी और केन्द्र सरकार के रवैये से असंतुष्ट व्यापारी व मजदूर वर्ग का भाजपा से नाराजी का लाभ मिल रहा है तो तेलेगंना में भाजपा के पूर्व दोस्त और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडू का साथ मिल रहा है। वहां नायडू की पार्टी तेलगू देशम कांग्रेस के साथ मिल कर चुनाव लड़ रही है मगर कांग्रेस वहां तेलंगाना राष्ट्र समिति पार्टी के मुख्यमंत्री के चन्द्र शेखर राव हैं ,जिन्होने पूरे विश्वास के साथ जून 2019 में समाप्त हो रहे कार्यकाल को बीच में ही समाप्त कर पुनः जनता की अदालत में जाने का निर्णय लिया था। ऐसे में कांग्रेस और तेलगू देशम उन्हें हरा पायेगी? सभांवना कम ही हैं। अब बचा कांग्रेस का अपना दस वर्ष पुराना किला मिजोरम जिसे अपना बनाये रखना राहुल गांधी के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। क्योंकि एक तरफ वे जहां मप्र, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाजपा एंटीकम्बैंसी की लहर पर सवार हैं तो मिजोरम में वे और उनकी पार्टी कांग्रेस स्वयं उसी एंटीकम्बैंसी की शिकार है। वैसे भी मिजोरम में उसके जन्म 1987 के साथ ही यह मिथक जुड़ा हुआ है कि कोई भी दल वहां लगातार 10 वर्ष ज्यादा सत्ता में नहीं रहता और कांग्रेस का ये 10 वां वर्ष है। बहरहाल चुनावी तीनों हिंदी भाषी राज्यों में बदलाव का असर साफ देखा जा रहा है और यही वो कारण है कि कांग्रेस काफी उत्साह में अपनी सरकार बनाने का दावा कर रही है।हालांकि अपनी सरकार बनाने का दावा भाजपा और उसके तीनों मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, बंसुधरा राजे सिंधिया और रमन सिंह भी कर रहे हैं मगर फैसला मंगल को करना है कि वो किसके साथ है?