मुख्यमंत्री शिवराज चौहान के आरोपों की खुली पोल

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मुख्यमंत्री शिवराज चौहान के आरोपों की खुली पोल

श्रीगोपाल गुप्ता

मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कांग्रेस पर लगाये उस आरोप की पोल उस समय खुल गई जब आज चुनाव आयोग ने सागर जिले की खुरई विधानसभा के रिटर्निंग अधिकारी को कांग्रेस की शिकायत पर तत्काल प्रभाव से हटाकर एक अन्य आईएएस अधिकारी को रिटर्निंग अधिकारी बना दिया। दरअसल प्रदेश के ग्रहमंत्री और भाजपा के प्रत्याशी भूपेन्द्र सिंह के विधानसभा क्षेत्र खुरई से 28 नवंबर को हुई वोटिंग के 48 घण्टे बाद 30 नवंबर को 48 ईवीएम बगैर नंबर की एक स्कूल बस जिला मुख्यालय पर भेजी गई। इस मुख्य विरोधी दल कांग्रेस के नेताओं को जानकारी मिली तो कांग्रेसियों ने इसका जोरदार विरोध करते हुये चुनाव आयोग से शिकायत कर आरोप लगाया कि जानबूझकर 48 घण्टे बिलम्ब से ईवीएम भाजपा प्रत्याशी भूपेन्द्र सिंह को गड़बड़ी कर लाभ पहुंचाने के लिए भेजी गई। इसके साथ ही कांग्रेस ने खरगोन में भी बिलम्ब पहुंची ईवीएम को लेकर आयोग के सामने सवाल खड़े कर दिये। हालांकि आयोग ने एक नायाब तहसीलदार को खुरई विधानसभा की मशीनें मतगणना स्थल पर देरी से पहुंचने के लिए दोषी मानते हुये सस्पेंड कर दिया था। मगर कांग्रेस बड़ी कार्यवाही पर अड़ी रही। इसके साथ ही गत मंगलवार को पुलिस मुख्यालय (होम गार्ड) भोपाल में मैस में पड़े मिले डाक मतपत्रों पर भी सवाल खड़े कर आयोग से तत्काल कार्यवाही करने की मांग की थी। कांग्रेस के इन आरोपों पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस को घेरते हुये उसे लोकतंत्र विरोधी ही करार दे दिया। चौहान ने कहा कि कांग्रेस आयोग पर आरोप लगाकर लोकतंत्र और जनता का मजाक उड़ा रही है। उनका कहना था कि अपनी हार देखते हुये कांग्रेस बोखला गई है और इसलिये वो वो मतगणना से पूर्व ही अपनी हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ रही है।इसके अलावा कांग्रेस ने कई जिला मुख्यालयों के मतगणना स्थल पर सुरक्षा के लिये लगी एलईडी क्ई जगहों पर घंटों बंद होने का भी मुद्दा आयोग के सामने उठाया है।

मगर आज आयोग द्वारा खुरई विधानसभा के रिटर्निंग अधिकारी विकास सिंह को कांग्रेस की शिकायत पर हटाते हुये सागर की अपर क्लेक्टर आईएएस तन्वी हुड्डा को नया रिटर्निंग अधिकारी बनाया है। इतना ही नहीं पुलिस मुख्यालय में लावारिश डाक मतपत्रों के मामले में भी कांग्रेस की शिकायत संज्ञान लेते हुये आयोग के आदेश पर एएसआई पूर्णिमा श्रीवास्तव को सस्पेंड कर दिया गया है जबकि होम गार्ड के नगर सैनिक श्याम सिंह व अनिल कुमार को हटाने की कार्यवाही की जा रही है।इस मामले में पोस्टमेन गोपाल प्रसाद प्रजापति के खिलाफ भी कार्यवाही की अनुशंसा की गई है।उल्लेखनीय है कि इस मर्तबा विधानसभा चुनाव 2018 गत 28 नवंबर को पूरे प्रदेश में एक ही चरण में शांति पूर्वक और लगभग तीन प्रतिशत ज्यादा मतदान करवा लेने के लिए चुनाव आयोग को चारो तरफ से बधाईयां मिल रही हैं। मगर क्ई जिलों में देरी से पहुंची ईवीएम मशीनों व भोपाल पुलिस मुख्यालय में लावारिश मिले डाक मतपत्रों व एक होटल में सदिंग्ध हालत में ईवीएम के साथ नशे में मिले पीठासीन अधिकारियों के कारण चुनाव आयोग की निशपच्छता पर प्रश्न चिण्ह भी लग गया और इन घटनाओं से सनसनी भी फैल गई। इसके साथ ही प्रदेश में गत पन्द्रह बर्षों से वनवास का भ्रमण कर रही कांग्रेस भी पंजाब, कर्नाटक और गुजरात की तरह सतर्कता के साथ ईवीएम की सुरक्षा में जी-जान से जुटी हुई है। चुनाव आयोग द्वारा उसकी शिकायत पर उठाये गए कदम से जहां कांग्रेस उत्साह से लबरेज है वहीं वो इसे अपनी मनो वैज्ञानिक जीत मान रही है। ईवीएम से जुड़ी बैईमानी की खबरों से कांग्रेस ठीक उसी तरह निपटने के मूढ़ में है जैसे उसने प्रदेश की अटेर, चित्रकूट, कोलारस और मूंगावली के विधानसभा उप चुनाव में बाजी मारी थी। मतगणना की बारीकी से परिचित कराने और प्रत्येक राउंड की गिनती का प्रमाण-पत्र लेकर आगे की मतगणना कराने का मंत्र देने के लिए अपने सभी 229 उम्मीदवारों को भोपाल बुलाकर प्रशिक्षण दिया है। बहरहाल अपनी सरकार बनने के प्रति आश्वसत कांग्रेस ईवीएम के मामले में कोई गुंजाइस छोड़ने के मूढ़ में नहीं है और वो अब मुख्यमंत्री के आरोपों को चुनाव आयोग द्वारा झूठा करार दिये जाने पर उलटे मुख्यमंत्री और भाजपा को घेरने में लगी है। इसमें वो कहां तक सफल होगी? अब ये सटीक-सटीक 11 दिसंबर को मतगणना के बाद ही मालूम चलेगा।