राहुल ने खोला PM मोदी के खिलाफ मोर्चा

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केंद्र की मोदी सरकार द्वारा आरटीआई विधेयक में प्रस्तावित संशोधन को लेकर अब देश की सियासत गर्म हो गई है। विपक्षी दलों ने आरटीआई एक्ट में बदलाव की कोशिश को बड़ा ही घातक करार दिया है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण में इस तरह के सरकारी कदम का विरोध किया है। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने ट्वीट के जरिए लिखा है, ‘सूचना के अधिकार कानून को कमजोर करके केंद्र सरकार सूचना आयुक्त को सरकारी गुलाम बनाने जा रही है, उनका कार्यकाल से लेकर फंड तक खुद के नियंत्रण में रखना चाहती है, AAP केंद्र के इस नाजायज पहल का विरोध करेगी।’सी तरह कांग्रेस ने भी भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी सच्चाई छिपाने में भरोसा करती है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में कहा, ‘हर भारतीय को सच्चाई जानने का अधिकार है। भाजपा का मानना है कि सत्य लोगों से छिपा होना चाहिए और उन्हें सत्ता में बैठे लोगों से सवाल नहीं करना चाहिए। आरटीआई में प्रस्तावित संशोधन इसे बेकार बना देंगे।’

वहीं, आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य रहे सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने तो आरटीआई एक्ट में बदलाव की कोशिश का बड़े ही तर्कों के साथ विरोध किया है। स्वराज इंडिया के संस्थापक भूषण ने अपनी बात बाकायदा वीडियो के जरिए सामने रखी है। बता दें कि केंद्र की मोदी सरकार ने सूचना का अधिकार (संशोधन) विधेयक 2018 ला रही है। केंद्र सरकार ने बुधवार को कहा था कि वह सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 में संशोधन करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है।

आरटीआई अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन केंद्र सरकार को केंद्रीय सूचना आयोग के सूचना आयुक्तों के कार्यकाल, वेतन और भत्ते और राज्य सूचना आयोगों के निर्णय लेने के लिए सशक्त बनाना चाहते हैं। सूचना आयोग सूचना तक पहुंच के दावों पर फैसले लेने वाले अंतिम अधिकारी होते हैं जो संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार है।