शहर की चौपट होती यातयात व्यवस्था, आमजनों के लिए घातक

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एकांगी मार्ग शहर की प्रमुख आवश्यकता
देवास। शहर की लचर यातायात व्यवस्था शहरवासियों के लिए घातक साबित हो रही है।
जिला मुख्यालय देवास की आबादी करीब तीन लाख के निकट पहुंच चुकी है। राष्ट्रीय राजमार्ग व राजमार्ग पर स्थित होने के कारण अंतरप्रांतीय यात्री बसे व बाहर वाहन का दबाव शहर को रहता है। इसके अलावा प्रदेश की व्यवसायिक राजधानी इंदौर व धार्मिक नगरी उज्जैन के कारण भी वाहनों का बोझ देवास शहर पर ही है।
देवास-इंदौर के बीच सर्वाधिक यातायात का दबाव है। जिसमें दो पहिया वाहन के अलावा यात्री बसे, छोटे चार पहिया वाहन की संख्या भी कम नही है। देखा जाए तो देवास शहर की नागरिकों की कस्बाई मानसिकता से अधिक सोच नही जगा है। जो यह दर्शाता भी है जैसा चल रहा है चलने दो। उसी का नतीजा है कि शहर मंे यातायात के बारे में प्रशासन व जनप्रतिनिधि रूचि लेकर कारगर कदम उठाने में कतराते है। शहर का मुख्य महात्मा गांधी मार्ग जो कि व्यापारी क्षेत्र है। व्यापारीक प्रतिष्ठानों के कारण मार्ग के दोनो ओर खड़े रहने वाले वाहनों के कारण पूरे दिन जाम की स्थिति में रहता है। लेकिन कभी यातायात पुलिस का जवान यहां झांककर देखना पसंद नही करता। इसी प्रकार कवि कालिदास मार्ग, अलंकार मार्केट, पीठा रोड़, विजया रोड़ की स्थिति बनी हुई है।
इन सब के बावजूद सुबह-शाम निकलने वाली स्कूल बसें जब इन मार्गों से गुजरती है तो भयावहता कप कपा देती है। एक प्रमुख व्यवसायी उमेश झंवर ने बताया कि इन मार्गों का जाम का मुख्य कारण यह है कि पूरे शहर में वाहनों के पार्किंग की कोई व्यवस्था नही है। इसके कारण व्यापारी व आमजन सभी परेशान है।