सोशल मीडिया – राजनीतिक लड़ाई का एक नया मैदान ?

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सोशल मीडिया – राजनीतिक लड़ाई का एक नया मैदान

आज मास मीडिया अपने कार्यों के लिए पारदर्शिता मांगने, आम जनता द्वारा सामना की जाने वाली किसी भी शिकायतों को दूर करने के लिए और एक शक्तिशाली जांच रखने के लिए महत्वपूर्ण साधन है | यही कारण है कि मीडिया लोकतंत्र की निगरानी के रूप में जाना जाता है | जैसा कि हम जानते हैं भारत में सोशल मीडिया एक बड़े पैमाने से विकसित हुआ है और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने ना केवल लोगों से जुड़ना आसान बना दिया है, बल्कि एक नेटवर्क भी प्रदान किया है जो राजनीतिक कथाओं और चर्चा करने में प्रभावी हो गया है और अपनी तत्कालता के कारण यह आज भारत में संचार का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुका है | स्टेटिसटा के अनुसार भारत में सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की संख्या 226 मिलियन (2018) है और यही 2021 तक 336 मिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है |

अनिवार्य,पिछले कुछ सालों में चुनाव प्रचार धीरे-धीरे डिजिटल क्षेत्र की तरफ बढ़ रहा है | पिछले कुछ वर्षों से राजनीतिक पहुंच के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल बहुत अधिक बढ़ गया है | राजनीतिक पार्टी युवाओं के साथ अपने एजेंडा और राजनीतिक घटनाओं को बताने के लिए के लिए इंटरनेट और सोशल मीडिया से जुड़ रहे हैं | 2014 के चुनाव में भारतीय जनता पा%