हमारी तासीर ही पर्यावरण प्रेमी की है

0
308

विश्व पर्यावरण दिवस विशेष

प्रकृति संरक्षण का कोई संस्कार अखण्ड भारतभूमि को छोड़कर अन्यत्र देखने में नहीं आता है. जबकि सनातन परम्पराओं में प्रकृति संरक्षण के सूत्र मौजूद हैं. हिन्दू धर्म में प्रकृति पूजन को प्रकृति संरक्षण के तौर पर मान्यता है. भारत में पेड़-पौधों, नदी-पर्वत, ग्रह-नक्षत्र, अग्नि-वायु सहित प्रकृति के विभिन्न रूपों के साथ मानवीय रिश्ते जोड़े गए हैं. पेड़ की तुलना संतान से की गई है तो नदी को मां स्वरूप माना गया है. ग्रह-नक्षत्र, पहाड़ और वायु देवरूप माने गए हैं.

यही कारण है कि प्राचीन काल से ही भारत में प्रकृति के साथ संतुलन करके चलने का महत्वपूर्ण संस्कार है. यह सब होने के बाद भी भारत में भौतिक विकास की अंधी दौड़ में प्रकृति पददलित हुई है. लेकिन, यह भी सच है कि यदि ये परंपराएं न होतीं तो भारत की स्थिति भी गहरे संकट के किनारे खड़े किसी पश्चिमी देश की तरह होती. हिन्दू परंपराओं ने कहीं न कहीं प्रकृति का संरक्षण किया है. हिन्दू धर्म का प्रकृति के साथ कितना गहरा रिश्ता है, इसे इस बात से समझा जा सकता है कि दुनिया के सबसे प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद का प्रथम मंत्र ही अग्नि की स्तुति में रचा गया है.

भारतीय विचारधारा में जीवन का विभाजन भी प्रकृति पर ही आधारित था। चार आश्रमों में से तीन तो पूरी तरह से प्रकृति के साथ ही व्यतीत होते थे। ब्रह्माचर्य आश्रम , जो गुरु-गृह में व्यतीत होता था और गुरुकुल सदैव वन-प्रदेश , नदी तट पर ही हुआ करते थे , जहां व्यक्ति सदैव प्रकृति से जुड़ा रहता था। वानप्रस्थ आश्रम में भी व्यक्ति वन प्रदेशों में रहकर आत्मचिंतन तथा जन कल्याण के कार्य करता था। संन्यास आश्रम में तो समग्र उत्तरदायित्वों को भावी पीढ़ी को सौंपकर निर्जन वन एवं गिरि कंदराओं में रह कर ही आत्मकल्याण करने का विधान था।
जिस प्रकार राष्ट्रीय वन-नीति के अनुसार संतुलन बनाए रखने हेतु पृथ्वी का 33 प्रतिशत भूभाग वनाच्छादित होना चाहिए , ठीक इसी प्रकार प्राचीन काल में जीवन का एक तिहाई भाग प्राकृतिक संरक्षण के लिए समर्पित था , जिससे कि मानव प्रकृति को भली-भांति समझकर उसका समुचित उपयोग कर सके और प्रकृति का संतुलन बना रहे।

आज पर्यावरण की अनदेखी मानव सभ्यता पर कालिख पोत रही हैं । इस दिशा में भागीरथी प्रयास जरूरी है। सर्वप्रथम यह हमारा सामाजिक दायित्व है कि हम स्वयं पर्यावरण हितैषी बनें जिससे पर्यावरण समृद्ध भारत बनाया जा सके।