हिमालय और हिंदुस्तान तथा जीवक राष्ट्रीय विद्यापीठ के संयुक्त तत्वाधान में ज्योतिष आयुर्वेद पर्यावरण संरक्षण पर सेमिनार संपन्न 

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देवास। जीवक राष्ट्रीय विद्यापीठ एवं हिमालय और हिंदुस्तान के संयुक्त तत्वाधान में गत दिनों आयुर्वेद, ज्योतिष, वास्तु एवं पर्यावरण संरक्षण पर एक विशाल सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसमें देवास के वरिष्ठ कवि एवं पंडित जयप्रकाश तिवारी जेपेश को हिमालय एवं हिंदुस्तान एक्सीलेंस अवॉर्ड एवं आयुर्वेद वैद्य बृहस्पति देव त्रिगुणा फैलोशिप अवार्ड 2018 से सम्मानित किया गया। देवभूमि ऋषिकेश क्षेत्र में नीलकंठ ऋषिकेश उत्तराखंड में आयोजित सेमिनार में रवि रस्तोगी, वैद्यराज मुरली प्रसाद लोधी, डॉक्टर महेशचंद्र चंद्रवंशी, राजवैद्य गंगाधर द्विवेदी, जागेश्वर प्रसाद शर्मा, एसके मिश्रा, रामपाल वास्तु, पंडित सुरेश कुमार गौड़, नैमिषारण्य के बाल कृष्ण शास्त्री स्वामी विजयानंद सरस्वती, शरद कुमार मिश्र आदि विद्वानों ने अपनी उपस्थिति दी व वास्तु ज्योतिष व आयुर्वेद विषय पर गहन विचार विमर्श किया। डॉ अर्जुन पांडे ने भारत सरकार के आयुष मंत्रालय से आयुर्वेद के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए उनके द्वारा समाज को लाभ लेने पर बल दिया।
सम्मेलन में अचार्य पंकज जी ने कहा कि भारत भाषाओं का विश्व गुरु है जो भाषा गुरु है वही धरती का गुरु है। न्यूटन ने धरती के गुरुत्वाकर्षण की खोज करी, जिसका बहुत प्रचार किया गया। हम प्रचार में मारे गए हैं। हमने आकाशीय गुरुत्वाकर्षण की खोज की है। धर्म को विज्ञान के क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। धर्म के साथ विज्ञान भारत में है। संस्कृत समुद्र है, समुद्र मे तेरा जा सकता है, पर पार नहीं पाया जा सकता। महेश चंद्रवंशी ने कहा कि सभ्यता, संस्कृति और संस्कार हमारे भूषण है। राज्य वैद्य ने बताया कि आयुर्वेद ओढ़ता, बिछाता हूं, पहनता हूं, खाता पीता भी हूं। मेरी मृत्यु भी आयुर्वेद में ही हो। विनोद जुगरात ने कहा कि विश्व गुरु भारत की नीव देवभूमि से ही रखी जाएगी। जिन्हें निष्प्राण कहा जाता है या यहां उनकी भी पूजा की जाती है। आज वेद संस्थान की स्थापना की जाना जरूरी है। शरद कुमार मिश्र ने कहा कि हमारा विज्ञान अनुभव की कसौटी पर कसा गया है। यहां कभी फेल नहीं हो सकता। डॉ. अर्जुन पाण्डेय ने कहा कि आयुर्वेद की उन्नति के बिना उन्नयन संभव नही है। आयु को संरक्षित करने वाले जो विज्ञान है। उसका सारा ज्ञान आयुर्वेद मे रहा है। आयुष मंत्रालय के द्वारा आयुर्वेद को लाभ मिलेगा। वैद्य रामपाल कश्यप ने बताया कि पांच तत्व अगर बैलेंस मे रहेंगे तो इलाज की जरूरत नही रहेगी। धर्म गुरूओ का सम्मान न हो तो समाज बिखर जाएगा। नेमिषारणय के संत बालकृष्ण शास्त्री ने बताया कि पूर्व काल मे वृहत्तर भारत ही विश्व था। चतुष्पाद के बिना संसार नही चल सकता, यही हमारी चातुर्वण्य संस्कृति है। इसके लिए शासन तंत्र के सहयोग की आवश्यकता है। आयुर्वेद जीवनशैली है। इसे लागू किया जाना चाहिए। डॉ. रवि रस्तोगी ने संचालन करते हुए कहा कि आयुर्वेद को राष्ट्रीय पेथी घोषित किया जाना चाहिए। योग, यज्ञपेथी, ज्योतिष व संस्कृति का अलग से मंत्रालय बनाया जाए।