आखिर श्रीमती नीना विक्रम वर्मा ही क्यों?

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श्रीगोपाल गुप्ता

मध्य प्रदेश विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 201धार से भारतीय जनता पार्टी की विधायक नीना विक्रम वर्मा के निर्वाचन को मप्र उच्च न्यायालय के माननीय जस्टिस श्री आलोक वर्मा ने गत सोमवार को अपने सेवाकाल समाप्ति के मात्र सात दिन पूर्व शून्य घोषित कर दिया है! उन्होने यह फैसला धार निवासी सुरेश चंद्र भंडारी की याचिका पर दिया, जिसमें भंडारी ने नीना वर्मा पर ये आरोप चस्पा किये थे, कि नामांकन के दौरान नीना वर्मा ने मांगी गई क्ई जानकारियां अधूरी दीं या नहीं दी थीं! ये फैसला गुजरे जमाने के भाजपाई दिग्गज विक्रम वर्मा व श्रीमती नीना वर्मा के लिए बहुत बड़ा झटका है, और शायद भाजपा के लिए भी बड़ा झटका है? हालांकि वर्मा को उच्च न्यायालय ने देश की उच्चतम न्यायालय में अपील करने का समय दिया है! मगर उसमें भी क्ई पेंच हैं! नीना वर्मा के साथ ये पहली बार नहीं हुआ, इससे पहले भी उनके 2008 के धार निर्वाचन में विजयी होने के चुनाव को भी मप्र उच्च न्यायालय द्वारा शून्य घोषित किया जा चुका है! ऐसा संभवतः देश में पहली मर्तबा ही हुआ होगा कि लगातार दो मर्तबा अलग- अलग कारणों से एक ही विधानसभा क्षेत्र से विजयी एक ही अभ्यर्थी का चुनाव शून्य पर घोषित किया गया हो! ऐसे में ये सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर नीना विक्रम वर्मा ही क्यों? भारतीय जनता पार्टी अथवा किसी भी बड़े राष्ट्रीय राजनीति दलों के पास विधी विशेषज्ञों की लम्बी चोड़ी फौज होती है, जो उनके उम्मीदवारों के नामांकन फार्मों की बारीकी से जांच कर नामांकन हेतु सक्षम अधिकारी के समक्ष पेश करते हैं!फिर इतनी बड़ी भूल कैसे? क्या किसी साजिश या हरकत का परिणाम है?जबकि नीना वर्मा पहले से ही “दूध की जली “हुंई थी!

दरअसल गत विधानसभा चुनाव 2008 में नीना वर्मा धार से भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार थीं,और कांग्रेस से बालमुंकद गोतम थे! गोतम को चुनाव मतगणना में 50,507 मत मिले थे ,जबकि वर्मा को 50,505 मत प्राप्त हुये तो उन्होने और उनकी पार्टी ने पुनः मतगणना की मांग की थी! गोतम के विरोध के बावजूद समक्ष अधिकारी ने विधी विरुद्ध मांग स्वीकार कर, पुनः मतगणना करवायी! और उसमें नीना वर्मा को एक वोट से विजयी करार दिया गया! इसके विरुद्ध बालमुंकद गोतम हाई कोर्ट चले गए! जहां हाई कोर्ट ने गोतम के पक्ष में फैसला देते हुये 14 अगस्त 2013 को नीना वर्मा की जीत को निरस्त करते हुये गोतम को विधायक निर्वाचित घोषित कर दिया! हालांकि गोतम का कार्यकाल बहुत ही सूक्षम रहा! विधायक घोषित होने के बाद गोतम ने 24 सितंबर को विधायक शपथ ली और 25 नवंबर 2013 में वर्तमान विधानसभा के चुनाव हो गये!इस चुनाव में धार गोतम और नीना वर्मा पुनः आमने थे! मगर इस दफा जनता ने नीना वर्मा का भरपूर संग दिया और उन्होने ने 14,482 मतों से ये चुनाव जीता! मगर इस दफा भी दुर्भाग्य से उनके खिलाफ आधी-अधूरी जानकारी नामांकन फार्म में देने का आरोप लगाकर सुरेश चंद्र भंडारी एडवोकेट ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की, जिसका परिणाम सामने है! नीना वर्मा के पति विक्रम वर्मा बीते दौर में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष, मप्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और अटल बिहारी बाजपेई सरकार में केन्द्रीय मंत्री पद पर रहे हैं, मगर अभी वे पूरी तरह से प्रदेश की राजनीति में हांसिये पर टंगे हुये हैं! यही कारण है कि नीना वर्मा का नामांकन शून्य पर घोषित हो जाने बावजूद भाजपा ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है और न ही ये जाहीर किया कि वो नीना वर्मा के साथ खड़ी है! और शायद यही कारण है कि फैसला आने के बाद जब सैकड़ों लोग भंडारी को बधाई दे रहे थे, तब उनमें तीन भाजपा के सांसद, छह विधायक व दर्जन भर नेता शामिलात थे! जो ये इशारा करते हैं कि सक्रीय राजनीति से बाहर होने के बावजूद विक्रम वर्मा से भंयकर नाराजगी पार्टी में अभी भी कायम है!और यही वो कारण है कि लम्बे समय से मप्र की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी की सरकार में नीना वर्मा को कोई जिम्बेदारी नहीं सौंपी गई और न ही पार्टी में कोई पद दिया गया!