चुनाव आ रहे है , चलो अन्नदाता को याद करे

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पिछले दिनों मध्यप्रदेश में जो  कुछ किसानो के साथ हुआ वह बहोत पीड़ा दायक है पर क्या जैसा दीखाया जारहा हे सब कुछ वैसा ही है क्या इसके पीछे  आगामी चुनाव तो नही ? मंदसौर अफीम माफियाओ पर कसा शकंजा तो नहीं ?मुद्दा हीन  विपक्ष की मजबुरी  तो नहीं ? या शिवराज की लोकप्रियता तो नहीं ?

 

केन्द्र एवं राज्य सरकार ने पिछले दो साल से मंदसौर एवं नीमच जिले के किसानों के डूडा चूरा बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया है. इसने हजारों किसानों विशेष रूप से मजबूत माने जाने वाले पाटीदार समुदाय के लोगों को बेरोजगार बना दिया है.’ गौरतलब है कि अफीम की खेती से डूडा चूरा निकलता है और इसका सेवन करने से नशा होता है. इसका उपयोग कुछ दवाइयों को बनाने में भी किया जाता है.

राज्य में अगले साल विधानसभा के चुनाव होना है. माना यह जा रहा है कि शिवराज सिंह चौहान से असंतुष्ट कुछ नेता उनकी किसान हितैषी छवि को इस आंदोलन के जरिए निशाना बना रहे हैं.

यह आंदोलन किसानों का नहीं, बल्कि राजनीतिक पार्टियों का है। जो सिर्फ इस आंदोलन के जरिये अपनी राजनैतिक रोटियां सेंक रही है। इस आंदोलन के द्वारा किसानों को बदनाम किया जा रहा है।

अतः सभी किसानों को सामने आकर इस राजनैतिक आंदोलन का विरोध करना चाहिए और यदि किसानों को कोई समस्या है तो उसके लिए सरकार से बात करें। स्वतंत्रता के बाद अधिकतर समय कांग्रेस की ही सरकार रही है। फिर क्या कारण है कि किसानों को आज आंदोलन करना पड़ रहा है। माना मोदी सरकार ने या प्रदेश सरकार ने किसानों के वादे पुरे नहीं किये, लेकिन आप लोगों ने किसानों की हालत सुधरने के लिए क्या किया था। जब इस देश में और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी।

यहां किसी एक आंदोलन से उत्पन्न स्थिति पर नही बल्कि देश में किसानों और गरीबों की समूची दशा पर चिन्तन करने की आवश्यकता है। इस बात की आवश्यकता है कि हम किसानों की समस्याओं को समझने का सिर्फ दिखावा न करें। मंदसौर में 6 किसानों की निर्मम हत्या करके उनकी लाश की सरकार द्वारा जिस दुर्दान्त तरीके से बोली लगाई गई है वह न सिर्फ हमारी सरकार को बल्कि हमारी संस्कृति को भी शर्मसार करता है।