सरकार से चलने वाला 1 रुपया जनता को क्या 100 पैसे के रूप में मिला है ?

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किसी भी प्रदेश का विकास तभी होता है ,जब जनता की तिजोरी में से निकला 1 रुपया पुनः जनता को जो 100 पैसे के रुप में मिलेl

प्रदेश में काम तो बहुत हुआ है पर क्या उससे जनप्रतिनिधियों की छवि स्वच्छ नजर आती है ?इस ढ़ेड दशक में अनेक छोटे- बड़े घोटाले  वगैरा दिखाई पड़ते हैं | परंतु उसके मुख्य किरदार वाले लोग जनता के सामने आते ही नहीं है |

जनता की तिजोरी पर हमें संपूर्ण स्वच्छता छवि वाले लोगों की बिठाने की आवश्यकता है | हमें चाणक्य जैसे ईमानदार राजनेताओं की जरूरत है जिनका निर्णय भी देश के हित में होता है और जिनके जीवन का लक्ष्य देशहित में होता है | स्वयं के उपयोग के लिए जो राज्य के दीपक तक का उपयोग नहीं करते हैं ऐसे कितने राजनेता भारत माता के पास हैं ,जिनका लक्ष्य भारत माता की सेवा का हैl दिन का लक्ष्य पार्टी हित नहीं बल्कि प्रदेश हित में होना चाहिए |

प्रदेश में ऐसे कितने नेता जिन्होंने आज तक अपने निजी उपयोग में जनता के 1 रूपए का भी उपयोग नहीं किया है | कभी हमने इस ओर सोचा है .हमारे जनप्रतिनिधि जनता के सामने बड़े-बड़े आयोजन करते हैं ,बड़ी-बड़ी यात्रा निकालते हैंlइन आयोजनों में कहीं जनता के पैसे का दुरुपयोग तो नहीं हो रहा है |

हम जनप्रतिनिधियों का चुनाव करना है lहमें ऐसे लोगों का कदापि चयन नहीं कर रहा है, जो हमारे पैसों का खुद के स्वार्थ पर खर्च करते हैं | फिर से इस देश को चाणक्य की आवश्यकता है प्रदेश की जनता को चाहिए कि विधानसभा में चाणक्य को भेजा कर प्रदेश का विचार करें |

नवरत्न सुनु