अनूठी पहल : प्रक्रति को संजोये हुए एक हाईटेक “मुक्तिधाम”

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नवनीत गुप्ता : जीवन में कही गयी बातों पर यकीन नही होता है लेकिन कुछ बातों पर यकीन करना होता है आज हम बात कर रहे है ऐसी जगह की, जहाँ हर कोई जाने से डरता है और हर कोई चाहता है वहाँ कोई अपना भी ना जायें…..वो जगह है जीवन की यात्रा का अंतिम ठहराव यानी की श्मशान (मुक्तिधाम)
इन सब बातो के विपरीत यहाँ लोग आने को उत्सुक रहते है और जब भी उस रास्ते से निकलते है तो सोचते है चलो यहाँ एक बार हो आये…ऐसी एक अनूठी जगह हमारे मध्यप्रदेश के छोटे से कस्बे पोरसा जो की मुरैना जिले में आता है……वहाँ के लाइन्स मुक्तिधाम के अध्यक्ष डॉ अनिल गुप्ता ने अपनी इस अनूठी कोशिश से मुक्तिधाम को एक आध्यात्म स्थान ,औषधीय वन ,और बच्चो के खेलने के लिये एक निर्मल स्थान बनाया है.जो कि प्रदेश में अपना अलग स्थान रखता है.
मुक्तिधाम को सरोकार बनाने की यात्रा में जब नवसंवाद  इस अनूठी जगह पहुँचा तो वहाँ के अध्यक्ष डॉ अनिल गुप्ता ने हमे बताया कि इस यात्रा की शुरुआत 1992 में हुई थी. इस पहल में कठिनाई तो बहुत आई लेकिन बाद में इस प्रयास को देखकर समाज के प्रबुद्ध लोग भी इस यात्रा को सफल बनाने में जुट गये और आज इस जगह को देखकर हर किसी का मन महक उठता है .

इस जगह को तीन जगहों में बाँटा है सत्यम शिवम और सुंदरम

पहला स्थान सत्यम जिसमे वाले स्थान में जीवन को मुक्ति मिलती है यानि शव की दाह संस्कार क्रिया होती है.दूसरा शिवम वाले स्थान में भगवान शिव का मंदिर है और तीसरा सुंदरम वाले स्थान में प्रक्रति को सजोंये हुये मनमोहक सौन्दर्य और औषधीय वन और बच्चो के खेलेने का स्थान है. यहाँ कई फल दार वॄक्ष भी लगाये गये है जामुन ,आम ,अमरूद ,अनार ,मौसमी, संतरा ,शह्तूत आदि . इसके साथ यहाँ कई धार्मिक कलाकृतियां जैसी ॐ .स्वास्तिक,हे राम, हरी शरणम ,माँ ,त्रिशुल और कलश की भी बनायी गयी है .

तीन जगहों में बाँटा है सत्यम शिवम और सुंदरम
तीन जगहों में बाँटा है सत्यम शिवम और सुंदरम

बनाया हाईटेक मुक्तिधाम
ये रही प्रक्रति और सुंदरता की बात अब बताते है कितना हाईटेक है ये मुक्तिधाम .यहाँ पानी से लेकर दाह संस्कार की क्रिया को डर अनिल के प्रयासों ने हाईटेक बना दिया है .यहाँ दाह संस्कार क्रिया के बाद लोगों की शुद्धता के लिये पानी के कई तरह के नल और फवारे लगाये गये है.यहाँ शव के लिये डीप फ्रीजर भी रखे गये है और तो और ऑनलाइन दाह संस्कार को देखने की भी सुविधा है यहाँ पर.लोगों के लिये बैठक हाल ,उनके लिये पानी पीने के लिये उत्तम व्यवस्था और कई ऐसी सुविधाएँ जो शोकाकुल परिवार के दुख के समय में सांत्वना प्रदान करती है.

बहुत ही रोचक हैं यहाँ कि दिनचर्या
इस जगह की एक खास बात यहाँ की दिनचर्या बहुत ही रोचक है यहाँ सुबह सुबह नगर की महिलायें युवा और वृद्धजन योगा करने आते है और .शाम को बच्चे खेलने आते है.यहाँ कभी कभी साधु संत भी साधनाये करने भी आते हैं .
मुक्तिधाम में समय समय कई सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम भी होते है जैसे दीपदान ,होली उत्सव ,शिवरात्रि आदि .यहाँ समय समय पर गणमान्य नागरिक ,जनप्रतिनिधि ,समाजसेवी और प्रशासनिक अधिकारी भी आते है….और इस प्रयास की सराहाना के साथ साथ यहाँ अपना योगदान भी देते है.

 

 बहुत ही रोचक हैं यहाँ कि दिनचर्या
बहुत ही रोचक हैं यहाँ कि दिनचर्या

इसके साथ ही यहाँ पर सुबह शाम पंछियों की करकल ध्वनियाँ भी सुनाई देती है और उनके लिए यहाँ दाना पानी की ख़ास व्यवस्था भी है .

दाना पानी की ख़ास व्यवस्था
दाना पानी की ख़ास व्यवस्था

 

लावारिस शवों के लिये भी विशेष
यहाँ लावारिस शवों के लिये भी विशेष व्यवस्था भी गयी है जैसे उनके दाह संस्कार से लेकर पिंड दान तक

लावारिस शवों के लिये भी विशेष व्यवस्था
लावारिस शवों के लिये भी विशेष व्यवस्था

भबिष्य की योजना
मुक्तिधाम में एक गोवेर्धन पर्वत का निर्माण किया जा रहा है और यहाँ अस्थि विसर्जन के लिए एक सार्वजानिक वाहन की भी व्यवस्था की जा रही है

डॉ अनिल गुप्ता का परिचय –

डॉ अनिल गुप्ता
डॉ अनिल गुप्ता

अनिल गुप्ता पेशे से एक कुशल चिकित्सक है आपका जन्म उत्तरप्रदेश के एक नगर सिरसागंज में हुआ था और आप तीस वर्षों से मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के पोरसा नगर को अपनी चिकित्सकीय सेवायें दे रहे है और साथ में कई समितियों के कई प्रतिष्ठित पदों पर भी रहे है.आपको शुरू से ही प्रक्रति के प्रति काफी लगाव था और आज भी आप बहुत बड़े स्तर पर प्रक्रति संरक्षण के लिये प्रयासरत है..चूँकि आप एक समाजसेवी है तो आप समय समय समाज के उत्थान के कार्यों में भी अपना योगदान देते है.

हमेशा सेवा भाव के लिए तत्पर रहते डॉ अनिल गुप्ता
हमेशा सेवा भाव के लिए तत्पर रहते डॉ अनिल गुप्ता