मैं विकास हूं मगर विपक्षी पार्टियों के लिए पागल भी हूं

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मैं विकास हूं मगर विपक्षी पार्टियों के लिए पागल भी हूं

श्रीगोपाल गुप्ता

यूं तो देश कि आजादी से पहले और बाद 70 सालों से अनवरत चलने वाला विकास हूं! मगर मुझे मेरी पुख्ता पहचान आज से चार वर्ष पूर्व जब मिली तब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र दोमोदर दास मोदी देश के तख्त पर बजीर- ऐ-आला के तौर पर बैठे थे! उससे पहले मैं विकास होते हुये भी विकास नहीं था यह देश के अंध भक्त भी मानते हैं और कहते भी हैं का सत्तर सालों से देश में विकास कहां था! अब ये अलाहदा विषय है कि अंग्रजों की गुलामी से आजाद होने के समय देश में सुई का कारखाना नहीं था! सत्तर सालों में निरंतर गतिशील होते हुये पूरे देश में सुई से लेकर हवाईजहाज़ और मिसाइलों का निर्माण चरम पर है। देश रौशनी की आगौस में है तो बड़े-बड़े बांध, पुल इत्यादि का जाल बिछा है। हजारों करोड़ों कल-कारखानों कि बहुयात है नये-नये अस्पतालों और रिसर्च सेन्टरों का जाल बिछा हुआ है, इस आधार पर मैं कह सकता हूँ कि ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां मेने आम आदमी के बीच पहुंच न बनाई हो! फिर भी मैं केवल सत्ता में जो राजनीतिक दल बैठा है उसी को दिखता हूं जबकि विपक्षी दल मुझे देखने की जरुरत ही महसूस नहीं करते और इतना ही नहीं मुझे विकास पगला गया है भी कहते हैं। यूं तो सतत चलने वाली प्रक्रिया हूं मगर मेरा महत्व चुनाव में आसमान पर होता है सत्ता पक्ष देश की भोली-भाली जनता को गहरी और अंधेंरी गलियों में मुझे दिखाने के लिए तत्पर रहते हैं जबकि विपक्षी दल मुझे पागल घोषित करने में अपनी पूरी ताकत जाया करते हैं। यह सही है कि चुनाव से पहले मैं सत्ता पक्ष और अधिकारियों के बीच में अक्सर फुटबाल बन जाता हूँ मगर जैसे ही चुनाव नजदीक आते हैं तो मैं देश में, प्रदेशों,नगरों और महानगरों और यहां तक गली गांव और मजरों टोलों में भी सबकी आंख का तारा बन जाता हूँ। न जाने कितने भ्रष्ट राजनीतिक और अधिकारियों को पैसों की त्रिवेणी को पार करा देता हूँ। मेरी एक और पुख्ता पहचान है जब मैं कहीं आता हूँ तब भारी विनास लाता हूं और आजकल तो आने के बाद भी विनास करता हूँ। जिसका सबसे मजबूत उदाहरण है मध्म प्रदेश जहां नवंबर में विधानसभा के चुनाव हैं।

यूं तो पन्द्रह वर्ष से सत्तारूढ भाजपाई मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में मैं अपना सफर तय कर रहा हूँ और यहां भी इतनी लंबी यात्रा तय करने के बाद विपक्ष के नेताओं को मैं दिखाई नहीं दे रहा हूँ बावजूद इसके मेरे नाम पर इन दिनों पूरे प्रदेश में शिलापट्टों को लगाने की बाड़ आ गई है! मैं भी पूरी तरह से प्रदेश में मेहरबान हूं। मगर प्रदेश के मुरैना जिले में भ्रष्टों की मेहरबानी से इस शहर में मैं ज्यादा ही मेहरबान हूं! तकरीबन पोने तीन साल पहले नगर पालिका परिषद से नगर निगम बने मुरैना में जैसे अधिकारियों मुझे पंख लगा दिये परिणाम सामने है। पहले तो सीवर लाइन बिछाने के नाम पर पूरे मुरैना शहर को शमसान में तब्दील कर दिया। हजारों नये मरीज दमे, खांसी और टीवी के तैयार डॉक्टरों की मेहरबानी पर छोड़ दिये। और अब नाला नंबर एक को पाटने के नाम दर्जनों गरीबों के आशियाने और दुकानें खण्डर में तब्दील कर दिये! जैसा कि मेने कहा था कि जब मैं विकास आता हूँ तो पहले विनास करता हूँ मगर अब महाभ्रष्ट अधिकारियों की मेहरबानी से विकास के बाद भी विनास करता हूँ! इसका जीता जागता नमूना कल शहर की जनता ने पतिराम-सीताराम कि धर्मशाला के नजदीक पुराना बस स्टैंड रोड पर हाल ही में डाली गई सीवर लाइन के बाद बनाई गई बेहतरीन और शानदार सड़क पर गिट्टीयों से भरा डंपर सलीके के साथ सीवर लाईन के ऊपर रोड धसकंने से पलट गया! खैर ये रही कि डंपर ने पलटते समय अगल-बगल से निकल रहे वाहन सवारों और पैदल चल रहे लोगों को बचने का पर्याप्त समय दे दिया अन्यथा क्ई लोग मुझ विकास पर शहीद हो जाते!हालांकि डंपर जिस मकान के पास गिरा उसमें जरुर दरारें आ गई हैं! ऐसा नहीं है कि यह पहली घटना हो वारिस के बाद तो ऐसी घटनायें सीवर लाइन के ऊपर डाली गई सड़कों पर आये दिन घटित हो रही हैं। अभी तीन दिन पहले मुरैना जिले की लाइफ लाईन समझी जाने वाली मुरैना-सबलगढ़ (एम एस) रोड पर ठीक एसपी बंगले के सामने रात्री के समय सीवर लाइन के ऊपर जमीन फट पड़ी और उसने एक कार और मोटर साइकिल सवार को अपने में समां लिया! इसका अलावा गली-मोहल्लों में अनेक लोग अपने हाथ-पैर तुड़वा चुके हैं मगर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अभी तक शासन प्रशासन ने कोई कार्यवाही अभी तक नहीं की है! स्थिति इतनी दयनिय है कि सीवर लाइन के नाम से मुरैना के लोगों डर लगने लगा है! मगर मैं विकास हूं जो बिपक्षी दलों की नजर में पागल है, चुनाव तक पीछा नहीं छोड़ूंगा। चाहे भ्रष्टाचार में ही डूबा हूं मगर आसन्न विधानसभा चुनाव से पहले मुरैना को तो विकसित करके ही रहूंगा क्योंकि मैं भ्रष्टारियों का मारा विकास हूं!