सो गये तो, वतन के मसीहा वतन बेच देंगे…

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Edited by- Navneet Gupta

श्रीगोपाल गुप्ता

भारत सरकार ने सिंतबर 2017 में लांच की “एडाप्ट ए हेरिटेज’ स्कीम के तहत 17 वीं शताब्दी के दिल्ली स्थित ऐतिहासिक लालकिले को डालमिया ग्रुप भारत को महज 5 करोड़ सालाना की दर से पांच वर्षों के लिए 25 करोड़ रुपयों में कथित रुप से गोद दे दिया है! मुगल बादशाह शहाजहां द्वारा बनवाया गया लालकिला अब पांच वर्षों तक डालमिया ग्रुप के पास होगा! वो इसका रख -रखाव ,यहां आने वाले पर्यटकों का विशेष ख्याल ,इसको संवारेंगे और विश्वव्यापी पर्यटन स्थल में तब्दील भी करेंगे?इसके साथ ही सरकार देश के इतिहास से जुड़ी और ऐतिहासिक इमारतों को उक्त स्कीम के तहत देश के विशुद्ध रुप से व्यवसायी घरानों को गोद देने का काम करेगी! लालकिले के बाद अब वारी विश्व प्रसिद्ध प्यार के अनूठे स्तंभ आगरे के ताजमहल की है जिसकी गोद भराई की रस्म की प्रक्रिया चालु हो गई है ! हालांकि सरकार के सूत्रों ने अभी यह नहीं बताया है कि सरकार भारतीय लोकतंत्र के मंदिर “संसद “को कब गोद देने का काम करेगी? क्योंकि संसद को भी गोद देने की देश में लंबे अरसे से जरुरत महसूस की जा रही है! विशेषकर पिछले चार सालों में जब अरबों रुपये खर्च करने के बावजूद संसद में उतना भी काम-काज नहीं हुआ जितना अपेक्षित था! ऐसे में इसे गोद दिया जाना ही श्रेष्यकर होगा,कम से कम गोद लेने वाला समूह इसे चमका-दमका कर अवाम का दिल तो बहला सकेगा? बैसे यहां विचारणीय प्रश्न यह भी है कि भारत को विश्व शक्ति और विश्व गुरु बनाने का ख्याव दिखाने वाली सरकार जब अपनी आजादी से जुड़ी और ऐतिहासिक इमारतों को सहजने में भी असमर्थ हैं?तो भारत विश्व गुरु कैसे बन सकता है?क्योंकि जो देश अपनी पुरा-संपदा और आजादी से जुड़ी मार्मिक व गौरवमयी यादों से जुड़े ऐतिहासिक अवशेषों को सहजने व संभालने में भी असमर्थ रहता हैं उनकी गिनती शक्तिशाली राष्ट्र के रुप में कैसे और क्योंकर हो सकती है?

सम्पूर्ण विश्व जानता है कि भारत की आजादी की रात ऐतिहासिक संसद में हुई थी तो 15 अगस्त 1947 की सुहानी सुबह दिल्ली के इसी एतिहासिक धरोहर लालकिले में हुई! जहां की प्राचीर से देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने विश्व को संबोधित करते हुये भारत की आजादी से रुबरु कराया था और देशवासियों को ये भरोषा दिलाया कि देश की सरकारें उनके हित में कार्य करती रहेंगी! आज उसी ऐतिहसिक लालकिले को जिसकी प्राचीर से प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त को देश प्रधानमंत्री जी देश के साथ -साथ विश्व को संबोधित करते हैं,महज पांच करोड़ रुपये वार्षिक गोद (ठेका) पर दे दिया है! आम आदमी पार्टी की स्थानीय विधायक अलका लांवा का दावा है कि लालकिले की खुद की आमदनी 18 करोड़ रुपये तो केवल आने वाले पर्यटकों को टिकट बेचकर ही हो जाती है! जबकि ऐतिहासिक लालकिले के पास क्ई सौ बीघा में पार्किंग की जगह बीच दिल्ली में है जो देश के किसी भी धरोहर स्थल के पास नहीं है! दरियागंज,चांदनी चौक, जामा मस्जिद और पुरानी दिल्ली सहित अनेक व्यस्त बाजारों की पार्किंग व्यवस्था के लिए केवल लालकिले की सैंकड़ों बीघा जमीन ही एकमात्र विकल्प है! इसके अलावा लालकिले का इस्तेमाल सामाजिक ,धार्मिक आदि कार्यों में भी किया जाता है जिससे करोंडो रुपये की आमदनी प्रत्येक वर्ष सरकार को होती है!ऐसे में महज पांच करोड़ रुपये वार्षिक पर गोद दिये जाने पर सरकार की नीयत पर सवाल खड़े होना लाज़मी हैं!कथित गोदनामा डालमिया ग्रुप ने इंडिगो एयर लाइंस और जीएमआर ग्रुप को पटकनी देने के बाद हांसिल किया है, मतलब इस अंधी कमाई के खेल में और भी बढ़ -चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं! सरकार का यह तर्क कितना खोखला है कि डालमिया ग्रुप से ये करार है कि कमाया हुआ पैसा लालकिले के रख-रखाव और सुविधाओं पर ही खर्च होगा?तो फिर ग्रुप क्या केवल देश सेवा ही करेगा! सरकार को पहले गोद पर दिये अपने हबीबगंज रेल्वे स्टेशन को देख लेना चाहिए कि सुविधा और पार्किंग के नाम पर किस कदर लूट मची है!एक गरीब मजदूर व्यक्ति को अपने पिता के निधन का समाचार मिला तो उसने अपनी मोटर सायकिल हबीबगंज स्टेशन पर पार्किंग में खड़ी कर ट्रेन से अपने शहर चला गया!जहां उसने आपस में चंदा कर व सरकारी सहयता से प्राप्त रुपयों से पिता का अंतिम संस्कार किया! जब वो गत दिवश 1 मई को वापस लोटा तो उसे पार्किंग का 3500 रुपये का बिल पकड़ा दिया! बड़ी मनोब्बलों के बाद मामला 2000 रुपयों में निबटा! ऐसे में किसी अनाम कवि की वो चार पंक्तियां याद आती हैं कि “चमन बेच देंगे, कली बेच देंगे!
धरा बेच देंगे, गगन बेच देंगे!आंख का पानी, शरम बेच देंगे!कलम के सिपाही अगर सो गये तो, वतन के मसीहा वतन बेच देंगे! देश को अभी कलम के सिपाहियों से आस है!अगर सो गये हैं तो जाग जायें कयोंकि ऐसे ही कुछ हालात देश में पैदा हो गये हैं!