अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष : सबला से संवाद

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स्वप्निल व्यास से विशेष संवाद में पदमश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन
स्वप्निल व्यास से विशेष संवाद में पदमश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन

अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में आज नवसंवाद मुखातिब हुआ एक ऐसी शख्सियत से जो नारी शक्ति के स्वरुप को चरितार्थ करती है जिन्होंने वर्ष 1985 में ग्रामीण एवं औद्योगिक विकास अनुसंधान केन्द्र, चंडीगढ़ में शोध-फैलो पद से त्यागपत्र देकर इंदौर में बरली ग्रामीण महिला विकास संस्थान की स्थापना में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया और वहां 26 वर्ष की सेवा में 6000 से ज्यादा आदिवासी और ग्रामीण महिलाये ,जिनमे से अधिकांश महिलायें मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और भारत के अन्य राज्यों के 500 गांवों से सर्वाधिक निरक्षर तथा सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़े परिवेश से आती हैं।उनको प्रशिक्षण देकर उन्हें सबल बनाया . इसी के साथ इन्होंने 1987-88 में नारू (गिनी वर्म) से प्रभावित झाबुआ जिले के गांवों में 302 दिनों तक रहकर वहां के लोगों को इस रोग से मुक्त होने का प्रशिक्षण भी दिया। और आज भी 69 वर्ष की उम्र में वे सोलर ऊर्जा ,जैविक खेती के लिए लोगो को प्रशिक्षण देती है और इनके लिए लोगो को प्रेरित भी करती है इस समाजसेवा के लिए समय समय पर उन्हें कई सम्मानों से सम्मानित भी किया गया है वर्ष 2015 में सामाजिक कार्यों के लिए पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया गया। इस परिचय के साथ हम बताते है उनका नाम . उनका नाम डॉ. जनक पलटा मगिलिगन है .जो जनक दीदी और सोलर नानी के रूप में भी  पुरे देश में मशहूर है जिनसे नवसंवाद के विशेष संवाद में उनके सार्थक जीवन यात्रा के बारे में चर्चा की एवं उनकी यात्रा के अहम् पहलुओ को छूने का प्रयास किया .
-समाजसेवा में इतनी क्षमता एवं इतनी ऊर्जा जो अपने आप में समेटी बैठी है उसका कारण उन्होंने बताया कि जब मेरा 15 साल की उम्र के बाद हार्ट सर्जरी हुआ और ईश्वर ने मुझे नया जीवन दिया तब से मैंने सोचा कि मैं अपना पूरा जीवन ईश्वर को धन्यवाद देने में लगाऊँगी यही कारण है कि इतनी क्षमता और इतनी ऊर्जा उन्हें ईश्वरीय शक्ति और जीवन में आस पास के तत्वो( जैसे लोग ,प्रकर्ति ,प्राणी) से मिली .
-वही एक नारी के रूप में उन्होंने अपनी यात्रा में हुई कठिनाईओं के बारे में बताया कि संघर्ष तो समाज सेवा में स्वाभाविक सी बात है पर ग्रामीण जीवन में समाज कार्य करते हुए कई कठिनाई तो आई पर मैं महिला हूँ और में इसे नहीं कर पाउगी ये अहसास कभी नहीं हुआ क्योंकि द्रढ़ आत्मविश्वास से हर कठिनाई को जीत जा सकता है
-अपने पारिवारिक जीवन के बारे में उन्होंने बताया कि हम दोनों में भाषा ,संस्कृति ,देश सब अलग थे पर हमारे विचार एक थे ,हम दोनों बहाई धर्म कि अनुनायी है, जिसमे मानवीयता एक पंक्षी कि तरह होता है और पति पत्नी उसके दो पंख है. हमारी जोड़ी ने इस विचार का अनुसरण किया और अपने साथी जिमी मगिलिगन के साथ मिलकर एक साधारण दम्पति के समान न जीते हुए एक बहुत बड़े परिवार का निर्माण किया .
-आधुनिक जीवन शैली के बारे में उनका कहना है कि जहाँ नैतिकता का पतन हो और संस्कारो कि उपेक्षा हो उसे वह आधुनिकता नहीं मानती , इसी के साथ उन्होंने आदर्श गावँ के बारे में कहा कि गावँ कभी आदर्श नहीं होते उसे बनाने वाले लोग आदर्श होते है
-युवाओ के विषय में इंदौर के युवाओ कि स्थिति में आये बदलाव के बारे में कहा कि जब वो एक रिसर्चर के रूप में इंदौर आयी थी जिसे उन्होंने कर्म स्थली बनाकर कार्य किया और जनक दीदी और सोलर नानी के  रूप में इंदौर की पहचान बनी परन्तु वर्तमान के युवाओ कि स्थिति के बारे में उनके विचार है कि शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक वातावरण चरित्र का निर्माण करता है , शिक्षा के साथ साथ व्यवहारिक शिक्षा की नितांत आवश्यकता है और ऐसी शिक्षा युवाओ को कर्मठ बनाएगी .
-इसी के साथ उन्होंने इंदौर के पर्यावरण संरक्षण के बारे में कहा कि पर्यावरण को हमारी जरुरत नहीं है हमें पर्यावरण कि जरुरत है .इंदौर सदैव से संभावनाओ का शहर रहा है इंदौर में पर्यावण संरक्षण के लिए काफी प्रयास किये जा रहे है और यहाँ सामाजिक चिंतन और सामाजिक कार्य का बीज आज भी इंदौर की धरा पर अंकुरित है, बस आवश्यकता है उसे सींचने की.
आखिर में सन्देश में कहा कि महिला एक शक्ति है जो समाज का,परिवार का निर्माण करती है बस आज जरुरत है उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की.

 

स्वप्निल व्यास से विशेष संवाद में