मप्र. कांग्रेस:हिंदी वा हिंदी तुर्की वा तुर्की

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Edited by- Navneet Gupta

14 साल से मध्यप्रदेश में वनवास का दंश झेल रही कांग्रेस ने पहली मर्तबा सत्तारुण भारतीय जनता पार्टी को अपनी पार्टी में बड़ा फेरबदल करके चुनौती पेश की है! आपसी कलह और गुटबाजी से बुरी तरह से त्रस्त कांग्रेस ने प्रदेश स्तर पर बड़ी सर्जरी करते हुये अरुण यादव को विदा कर अनुभवी और सबके साथ समनवय कर चलने वाले पूर्व केन्द्रीय मंत्री और कद्दावर नेता कमलनाथ को प्रदेश का नया अध्यक्ष घोषित किया है! इसी साल नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुये ये काफी महत्वपूर्ण है और इसके साथ ही काफी लंबे समय से चल रही अटकलों को भी विराम लग गया! कमलनाथ जिन्हें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अपना तीसरा बेटा मानती थीं, काफी अनुभवी और क्ई दशकों से कांग्रेस से जुड़े हैं नेता हैं, जिन्होने गांधी परिवार में इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी के साथ काम करने का अच्छा खासा अनुभव है, वे क्ई मर्तबा केन्द्रीय मंत्री भी रहे हैं! इसके साथ ही पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रदेश चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष का दायित्व दिया गया है, जो चुनाव के दृष्टी से महत्वपूर्ण है! सिंधिया जिनको आसन्न विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का चेसरा घोषित करने की मांग की जा रही थी, मगर चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनाये जाने से यह लगभग कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वो चेहरा घोषित नहीं करेगी!

कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी के संगठन पर नकेल कसने के लिए पहली मर्तबा चार कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाये हैं, जो प्रदेश कांग्रेस की संस्कृति का कभी हिस्सा नहीं है! प्रदेश के चारों हिस्सों से चार कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी, सुरेन्द्र चौधरी, बाला बच्चन और चंबल से रामनिवास रावत को बनाया है! जो अपने आप में जरा हट के है, जिसका लिटमस टेस्ट अगामी विधानसभा चुनाव में होगा! हाल ही में भाजपा ने लगातार चार उप चुनाव में हार के लपेटे में आये नन्द कुमार चौहान को हटा कर महाकोशल क्षेत्र से जबलपुर से तीन दफा के सांसद और लोकसभा में पार्टी के मुख्य व्हीप राकेश सिंह को प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बनाना गया है और प्रदेश चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को बनाया है! तभी कांग्रेस में इस मांग ने जोर पकड़ लिया था कि कांग्रेस के दिग्गज और महाकोशल क्षेत्र के छिंदवाड़ा के सांसद कमलनाथ को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाये और चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया को बनाया जाये! इसके पीछे ये रणनीति थी कि कमरनाथ को अध्यक्ष राकेश सिंह को महाकोशल में और ग्वालियर के सांसद ,केन्द्रीय मंत्री तोमर को ग्वालियर के ही सिंधिया के मार्फत घेरा जाये और उनके असर को उनके ही क्षेत्र में कम किया जा सके है! दरअसल भाजपा को घेरने के लिए कांग्रेस ने प्रदेश में सबसे मजबूत नेता कमलनाथ को दांव लगाकर भाजपा को चौथी बार प्रदेश में सरकार बनाने से रोकने की कोशिश की है! बहरहाल कांग्रेस ने भाजपा को उसी की भाषा में “हिंदी वा हिंदी, तुर्की वा तुर्की ” में जबाव दिया है, फिलहाल इसके परिणाम तो नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद ही आयेंगे मगर कांग्रेस कार्यकर्ता कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया की नियुक्ति से जोश में हैं!