मुरैना डेंगू की चपेट में, जिम्मेदार नदारत

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श्रीगोपाल गुप्ता

आसन्न विधानसभा चुनाव की आहट से पूर्ण रुप से राजनीतिक सरगर्मी में लिप्त मुरैना इन दिनों जानलेवा मच्छर ‘डेंगू’ की चपैट में आ गया है। हालांकि अभी तक कोई जनहांनी तो नहीं हुई है मगर जिला अस्पताल सहित निजी चिकित्सालयों में डेंगू के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। यदि दीगर दूर-दराज के क्षेत्रों को छोड़ दें तो मुरैना शहर का सबसे महत्वपूर्ण और ह्रदय वार्ड कहलाने वाले हनुमान चौराहा वार्ड नंबर 23 भी डेंगू’ के कहर से हलकान है। पिछले तीन दिन में दो मरीज डेंगू’ के सामने आये हैं जो जीवन और मौत के बीच झूल रहे हैं। जिनमें से एक प्रसिद्ध व्यवसायी को पहले ग्वालियर और अब दिल्ली ईलाज के लिए शिफ्ट किया गया है जबकि दूसरा 13 वर्षिय बालक स्थानीय जिला अस्पताल में भर्ती है। जहां तकरीबन 50-55 मरीज पहले से ही डेंगू’ के कहर का सामना कर रहे हैं,इनमें काफी संख्या में बच्चे और नोजवान भी शामिल हैं।इस खूंखार और जानलेवा बीमारी का सबसे दुःखद पहेलु यह है कि इन बच्चों का डेंगू’ का ईलाज कर रहे सरकारी जिला अस्पताल के एक प्रतिष्ठित चिकित्सक का अपना बेटा भी डेंगू’ के कहर का सामना कर रहा है बावजूद इसके स्वास्थ विभाग और मलेरिया की सफेद हाथी हो चुकी टीम मैदान से गायब है। लिहाजा आम लोगों तक डेंगू’ की बीमारी से बचाव और ईलाज की सूचना नहीं पंहुच पा रही है। अभी तक इतने मरीज जिला अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने कोई कदम नहीं उठाया है और न ही आमलोगों का जागरुक करने का कदम उठाया है। डेंगू के दनादन आ रहे मरीजों के बावजूद जिला अस्पताल प्रबंधन अभी तक डेंगू वायरस की जांच के लिए “ऐलीजा कनर्फम टेस्ट “की सुबिधा मुरैना में उपलब्ध नहीं करा पाया है लिहाजा मरीज के परिजन को ग्वालियर की दौड़ लगानी पढ़ रही है।आम जनता से लेकर आला अधिकारी तक डेंगू’ की तबाही से बाफिक हैं मगर ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’हो चुके मुरैना शहर की चिंता किन्ही हुक्मरानों को नहीं है। चारो तरफ सियासतदानों से लेकर हुकुमरानों तक केवल आने वाले विधानसभा चुनावों के शौर के तले प्राणघातक डेंगू’ की बीमारी दब कर रह गई है।

“इधर क्लीन मुरैना ग्रीन मुरैना” का बेल्ट गले में डालकर नगर निगम चुनाव में शहर को सुंदर और स्वच्छ बनाने का वादा कर जीत कर आये नगर सरकार के कलंगीधारी सरकार और उनके सिपलसलाहकार भी डेंगू’ के कहर से पिसती जनता को बचाने के लिये अभी तक सामने नहीं आये हैं। जब वो ही सामने नहीं आये हैं तो निगम के भ्रष्ट और नकारे अधिकारियों को नगर की जनता से क्या लेना देना?शहर में सफाई और स्वच्छता अभियान के हालात इतने बदतर और भयानक हैं कि राह चलते हुये किसी नागरीक डेंगू’ अपना शिकार बना ले। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सबसे ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छ भारत अभियान के लिए आया बेसुमार पैसा हजम हो गया मगर शहर में पसरी गंदगी का कोई ईलाज अभी तक नहीं हो पाया है। मजे की बात यह है कि कागजों में तो मुरैना खुले में शौच मुक्त हो गया मगर हकीकतन रेल लाइनों के किनारे हजारों लोग खुलेआम रोज खुले में शौच बिना किसी रोक-टोक के कर रहे हैं। महिनों से नालियों की सफाई नहीं, जगह-जगह गंदगी के ढैर लगे हैं, जो मच्छरों को खुलेआम आमंत्रित कर रहे हैं। मगर निगम के कर्ता-धर्ता कागजों में ही “क्लीन मुरैना ग्रीन मुरैना “बनाने पर तुले हुये हैं नतिजन डेंगू’ ने केवल दस्तक दी बल्कि मुरैना को अपनी चपैट में ले लिया। लिहाजा अब जिला प्रशासन को चुनाव व्यवस्थाओं के बीच तत्काल इससे पहले डेंगू’ मुरैना में महामारी का रुप धारण कर ले तत्काल इससे निपटने के लिए युद्ध स्तर प्रयास शुरु कर देने चाहिये। क्योंकि चुनाव तो फिर भी होंगे लेकिन डेंगू’ के कहर से अपनी जान से हाथ धो लेने वाला इंसान कभी वापिस नहीं आयेगा।