फिर एक बार देश को बहलाने की कोशिश

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Edited by- Navneet Gupta

– श्रीगोपाल गुप्ता –

12 वर्ष से कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने की सजा अब फाँसी होगी! ऐसी सहमति गत दिवश प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में सपन्न हुई केबीनेट की बैठक में बनकर सामने आई! देश में प्रचलित कानून “पाँक्सो “में सजा बढ़ाने के साथ -साथ और भी क्ई महत्वपूर्ण सुधार भी किये गये हैं जो स्वागत योग्य हैं! अब इस अध्यादेश पर माननीय राष्ट्रपति जी ने हस्ताक्षर भी कर दिये हैं! महामहिम के हस्ताक्षर करने के साथ यह इस अध्यादेश ने कानून का रुप ले लिया है जिसे छह माह के अंदर संसद में पास कराना होगा!पाँक्सो में सुधार के बाद चारो तरफ से सरकार के इस कदम की सराहना हो रही है! ये सिलसिला पहले जैसा ही है, जैसा कि पूर्व की सरकारों के समय में भी होता था! ऐसे में ये सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अब से पहले देश में दुष्कर्मियों को कड़ी सजा दिलवाने के लिये पाँक्सो व अन्य कानून सक्षम नहीं थे?यहां सवाल यह भी कि क्या कानून का अपर्याप्त थे? या इनको लागू करवाने व करने में सरकार और पुलिस की इच्छा शक्ति का अभाव था ? सवाल यह भी है कि देश में “निर्भया”जैसा भीभत्स कांड होने के सात-आठ साल होने के बावजूद पुलिस अभी तक वर्तमान पाँक्सो व अन्य कानूनों के तहत कितने बहसी दरिंदे दुष्कर्मियों को सींचकों के अंदर भेज चुकी है? कितनी बच्चियों के साथ हुई इस कायरना हरकतों में उन्हें न्याय मिला? इस देश के आज के हुकुमरानों को यह समझ लेना चाहिए कि कानून देश में आजादी के साथ ही लागू है कोई आज से कानून लागू करने की कोशिश नहीं की जा रही है! एक तरफ अभी कठूआ में एक आठ साल की बच्ची के साथ बहुत दरिंदगी के साथ क्ई दिनों तक सामूहिक दुष्कर्म करके उसकी हत्या करने का खौफनाक मंजर सामने आया तो दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में एक नावालिक के साथ सामूहिक दुष्कर्म के हाई प्रोफाइल मामले का पर्दाफास भी हुआ! वो भी तब जब पीड़िता के पिता को आरोपियों ने पीट-पीटकर कानून के रखवालों की मदद से निरपराध जेल में बन्द कर दिया, जहाँ उसकी मृत्यु हो गई! तब मीडिया की नींद टूटी और वो हरकत में आई, तब कहीं जाकर उस बच्ची की रिपोर्ट लिखी गई!

ऐसे में यह कहा जा सकता है कि कठूआ और उन्नाव में हुये इन बहींशियानां हरकतों के लिये देश का मौजूदा कानून किस कदर अपने को लागू किये जाने वाली सरकार और पुलिस की तरफ आशा की उम्मीद के साथ ताक रहा था! सवाल ये पैदा होता है कि कानून चाहें जितना सख्त हो, उसे लागू कोन करेगा? पुलिस या सरकार? या दोनों नहीं? क्योंकि दबाव दोनो पर होता है, अगर मुजरिम प्रभावशाली हो या फिर हिंदु-मुस्लिम हो? कठूआ में क्या हुआ? वहां कानून मुस्तैदी से अपना काम कर रहा था! फिर ऐसा क्या हुआ कि आदमखोर दुराचारियों को बचाने के लिए कथित वकीलों की फौज और कथित हिंदू संगठन जिसमें जम्मू-काश्मीर सरकार के दो मंत्री भी शामिल थे ,ने अधिकारियों को कोर्ट में चार्जसीट दाखिल करने से बलात् रोका !यदि इन कथित लोगों को मामले की सीबीआई जांच चाहिए थी तो किसने इन्हें रोका ? जम्मू -काश्मीर में सरकार भाजपा -पीडीपी की है और केन्द्र में भाजपा है तो सीबीआई जांच से किसे और क्या आपत्ति थी! मगर दुष्कर्मियों से ज्यादा उस बच्ची की आत्मा को इन वकीलों की फौज और सरकार ने ज्यादा कष्ट दिया है, क्योंकि ये कानून को लागू नहीं करवा पाये! कानून तो लागू होने के लिए तैयार था वहां भी और उन्नाव में भी,मगर रखवाले दबाव में बेबस ही नजर आये! उन्नाव में जून 2017 में दुष्कर्म का कंलक ढो रही उस नावालिक बच्ची को महिनों बाद भी कहीं भी न्याय नहीं मिला!तव शाही दरबाजों पर न्याय की भीख मांगते -मांगते थकने के बाद उसने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के महल के बाहर आत्मदाह का प्रयास करना पड़ा ,फिर भी कड़े कानून के तरफदार योगी महाराज सोते रहे! नींद से जब जागे तब उनकी ही पार्टी के कर्णधार और दुष्कर्म के आरोपी विधायक कुलदीप सेंगर के भाई और उनके गुर्गों ने पीड़ित के पिता की जमकर मार लगाई और जेल में डलवा दिया.,जहां उसकी मौत हो गई, तब मीडिया ने हूंकार भरी और माननीय हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई! तब कुलदीप सेंगर के खिलाफ धड़ाधड़ तीन एफआईदर्ज की गई जिसमें पाँक्सो तहत भी कार्यवाही की गई थी! बावजूद प्रदेश के डीजीपी दुष्कर्म के आरोपी को माननीय विधायक जी कहते रहे और गिरफ्तार न करने की कसमें सार्वजनिक तौर पर खाते रहे! जबकि पाँक्सो में तुंरत गिरफ्तार करने के सख्त आदेश हैं! तो वर्तमान कानून तो चाक -चौबंद था, मगर उन पर अमल तो होता!नहीं तो क्या कारण है कि मप्र में यह कानून पहले से ही लागू है बावजूद इसके इंदौर में एक आठ वर्षिय दूधमुंही बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या हो जाती है और “सत्य मेव जयते ” की हामीदार पुलिस रात में बच्ची के गायब होने की रिपोर्ट लिखाने उसके परिजन थाने जाते हैं तो पुलिस कहती है कि कल सुबह 12 बजे आना! तब उस दुष्कर्मी ने बच्ची को ही दरिंदो की तरह नोच खाया! इसलिए देश में चाहें जितने कड़े कानून बन जाये, जब तक कड़ाई और निश्पच्छता के साथ लागू नहीं किये जायेंगे, तब दुष्कर्मी इसी तरह घिनौना खेल खेलते रहेंगे! फिलाहल कानून में संशोधन मात्र देश को एक बार पुनः बहलाने का बहाना मात्र है!
“हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन, दिल को बहलाने के लिए “गालिब”ये ख्याल अच्छा है “!