साई बाबा ने कभी नहीं कहा कि “मैं भगवान् हूँ” : अरुण गायकवाड़

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स्वप्निल व्यास : लक्ष्मीबाई शिंदे साई बाबा की ऐसी एकनिष्ट भक्त थी, जिसकी सेवा का ध्यान बाबा को अंतिम समय में भी रहा और लक्ष्मीबाई को नवधा भक्ति के रूप में नौ सिक्को का दान देते हुए बाबा ने अपनी अंतिम सास छोड़ी .

आज नवसंवाद मुखातिब हुआ लक्ष्मीबाई शिंदे की बेटी शैलजा माँ के बेटे लक्ष्मी बाई के परपोते अरुण गायकवाड़ से , जो कि नाइन कॉइन टेम्पल के ट्रस्टी भी है एवं फिलहाल नौ सिक्कों को लेकर देश एवं विदेश के भ्रमण पर है . उनका उदेश्य इस के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोगो को नवधा भक्ति का दर्शन करना है

नव संवाद से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनकी नानी अर्थात लक्ष्मीबाई कहती थी कि बाबा कभी अपने आप को भगवान् नहीं मानते थे और न हीं उनका कोई अवतार है. बाबा के शल्क्ति और भक्तो की कामना पूर्ति ने उन्हें भगवान बनाया नौ सिक्कों का दान के बारे में उन्होंने बताय कि यह हमारी नानी की भक्ति का उपहार और हमारी विरासत है . इसके बदले में लोग हमें करोडो रुपया देने को भी तैयार है पर यह साई भक्तों के लिए है .वही इनके मंदिर के सन्दर्भ में उन्होंने बताया देश ही नहीं विदेशो से भी भक्त चाहते है कि उनके क्षेत्र में मंदिर का निर्माण हो ,पर शीलेजा माँ शिरडी की परिधि में ही इसका निर्माण चाहती है .

जल्द ही होगा नाइन कॉइन टेम्पल का निर्माण जहाँ दर्शन के साथ साथ भक्तों को वो भोजन मुफ्त में मिलेगा जो कि लक्ष्मीबाई बाबा को कराती थी .जिसकी विधि और नाम के लिये फाइव स्टार होटल वाले भी शैलजा माँ के पास आते है पर उन्होंने इसे गुप्त रखा है.

अंत में उन्होंने कहा की अब जल्द ही यह मंदिर में स्थापित हो जाएगे और वह समय होगा सिक्कों और बाबा की महासमाधि की शताब्दी . वही इंदौर के सन्दर्भ में उन्होंने कहा कि यहाँ सुखद सयोग है कि साक्षात् साई का आशीर्वाद उस समय इंदौर की धरती पर आया जब इंदौर को नंबर वन का पुरस्कार स्वच्छता के क्षेत्र में मिला.और यहाँ के लोगों के बारे में कहा यहाँ के लोग मन से भी स्वच्छ है .