तेजस की एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग कामयाब

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आज सुबह  जहां एक ओर पूर्ण स्वदेशी तकनीक से निर्मित लडाकू  लाइट कम्बैट एयरक्रॉफ्ट (एलसीए) तेजस में  बीस हजार फुट की ऊंचाई पर ईंधन भरने का इतिहास  भारत द्वारा रचा जा रहा था उसी दौरान  ग्वालियर से इसपर पैनी नजर रखी जा रही थी। एचएएल एवं एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी के डिजायनर्स ने ग्वालियर ग्राउंड स्टेशन से इस पूरी प्रक्रिया पर करीबी से नजर रखी। 

ग्वालियर । अपने विकास क्रम में एक बड़े कदम के रूप में भारत में निर्मित तेजस लड़ाकू जेट फायटर में पहली बार भारतीय वायुसेना टैंकर विमान से हवा से हवा के बीच में फ्यूल भरने में कामयाबी हासिल की है। नेशनल फ्लाइट टेस्ट सेंटर के टेस्ट पायलट ग्रुप कैप्टन राजीव जोशी द्वारा उड़ाया गया विमान, सिंगल इंजन फायटर की सीमा का विस्तार के अपना अंतिम ऑपरेशनल क्लीयरेंस (एफओसी) प्रमाण पत्र हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हैं।
म्ंगलवार को 1 बजे के बाद यह परीक्षण ‘‘ड्राई’’ लिंक शामिल करते हुए एक आयोजित किया गया दूसरे शब्दों में भारतीय वायुसेना के ईएल-78 टैंकर और तेजस लड़ाकू विमान के बीच वास्तव में आदान प्रदान नहीं किया था यह हवा से हवा में रिफ्यूलिंग की जांच भर थी। ईधन को टैंकर से लडाकू विमान में स्थानांतरित करने के लिये ‘‘वेट’’ परीक्षणों समेत इस क्षमता को मान्य करने के लिये नौ और परीक्षण आयोजित किये जायेंगे। तेजस में एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग की जांच अन्तरराष्ट्रीय एयरोस्पेस सिस्टम प्रमुख कोबम द्वारा डिजाइन की गयी हैं।
स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस के नौसेना संस्करण परीक्षण कामयाब
सूत्रों के अनुसार तेजस सेनानी ने मध्य-वायु रिफ्यूलिंग के कम्प्यूटर सिमुलेशन को पूरी तरह से दोहराया गया जो कि तेजस कार्यक्रम से जुड़े इंजीनियरों द्वारा जमीन पर किया गया है।

इस लड़ाकू विमान का उत्पादन करने वाले हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने एक बयान में कहा, ‘तेजस में ईंधन भरने का काम 20, 000 फुट की ऊंचाई पर किया गया। इस दौरान लड़ाकू विमान की रफ्तार 270 नॉट्स थी। विमान के सभी आंतरिक टैंक्स एवं ड्राप टैंक्स को ईंधन से भरा गया’