बाकई आंकड़े बहुत डरावने व खतरनाक हैं : श्रीगोपाल गुप्ता

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मप्र राज्य सरकार के अथक प्रयासों व 12 वर्ष की कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने की सजा फांसी वाला पहला राज्य बनने के बावजूद महिलायों और बच्चियों के साथ दंरिदों की दरंदगी रुकने का नाम नहीं ले पा रही है! मात्र तीन महिनों में 95 गैंगरेप और 49 हत्याओं की घटना काफी है सरकार और सभ्य समाज को हैरान व विचलित कर देने के लिए। तमाम उपाय, सतर्कता व रोक के बावजूद प्रदेश सरकार दुष्कर्म की घटनाओं पर किसी तरह की रोक लगाने में असमर्थ साबित हुई है। ग्रह मंत्रालय द्वारा जारी ये आंकड़े चौंकाने और विचलित कर देने वाले हैं। नवंबर 2017 से लेकर फरवरी 2018 मात्र तीन महिने में 62 महिलाओं और 33 बच्चियों के साथ सामूहिक दुष्कर्म के मामले दर्ज हुये हैं। इतना ही नहीं दुष्कर्मियों ने अपनी पहचान छुपाये रखने के लिए सामूहिक दुष्कर्म के बाद 6 बच्चियों सहित 46 महिलायों की हत्या कर दी। जबकि सबसे डरावना पक्ष ये है कि 10 महिलायों को जिंदा जलाने के मामले भी पुलासपुलिस में दर्ज हुये हैं। ये सब प्रदेश में जब हुआ है तब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने स्यंम व्यथीत होकर देश में पहली मर्तबा सामूहिक दुष्कर्म की सजा फांसी वाला कानून पास कर घटनाओं को रोकने की पूरजोर कोशिश की है! मगर आंकड़े और रोज-रोज अखबारों में छपने वाले दुष्कर्म के समाचारों ने आम जनमानस और सरकार के लिए चुनौती खड़ी कर दी है कि आप कुछ भी कर लो फिलहाल तो प्रदेश में दंरिदें दंरिदंगी का खुला खेल खेल कर ही रहेंगे!हालांकि सरकार ने अपनी तरफ से पूरी कोशीश है की है कि प्रदेश का माहौल बच्ची और महिलाओं के लिए सुखद और बेहतरीन हो बावजूद प्रदेश दुष्कर्म के आकांताओं से मुक्त नहीं हो पा रहा है। महिला विरोधी अपराध को जड़ से उखाड़ फैंकने के लिए राज्य शासन ने महिला अपराध शाखा का गठन किया है जो देश का पहला गठन है। इसमें चार जोनल पुलिस महानिरीक्षक भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में तैनात है।सरकार ने महिला शिकायत के लिए महिला डेस्क और महिला हेल्प लाइन नंबर 1090 बनाया है। सरकार ने सार्वजनिक जगहों पर कैमरा लगाने कि बात कही है और काफी हद तक लग भी गये हैं। बावजूद इसके बच्ची और महिलायें इस घौर शर्मसार कर देने वाले अपराध से लगातार सामना कर रही हैं! अभी हाल ही में ग्वालियर में अपने परिवार के साथ शादी में गई छह वर्ष की बच्ची फिर मंदसौर में आठ साल की बच्ची के साथ अत्यंत घिनौना और जानलेवा दुष्कर्म और फिर भोपाल और अब ग्रह मंत्री के ग्रह जिला सागर में नाबालिक के साथ दुष्कर्म की घटनाओं ने सम्पूर्ण देश को हिलाकर रख दिया है। देश में प्रदेश दुष्कर्म में नंबर एक हो गया है। देश का ह्रदय मध्य प्रदेश अब आम भारतीयों के विशेषकर महिलाओं और बच्चियों के लिए खौफ का प्रतीक बन गया है। इसके लिये थानों और महिला डेस्क पर बैठने वाले पुलिस कर्मी तो जिम्मेदार है हीं साथ में सत्तारूढ़ पार्टी के महत्वपूर्ण ओहदेदार मंत्री भी कम जिम्मेदार नहीं हैं।एक तरफ जहां पुलिस थाने में बैठे लोग बच्ची और महिलाओं की गायब होने की रिपोर्ट लिखवाने आये परिजनों से पेश आते हैं और लापरवाही दिखाते हैं वो भी एक कारण कि इन अपराधों में इजाफा हो रहा है। मंदसौर में आठ साल की बच्ची के मामले में यदि पुलिस फालतु के सुझाव परिजनों को न देते हुये सक्रियता का परिचय देती तो शायद इस कलंककारी घटना से बचा जा सकता था।आपको याद होगा गत वर्ष भोपाल के हबीबगंज रेलवे ट्रक के पास एक नावालिक छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटी घटना का जिसमें एक आईपीएस महिला एसपी किस बदतमीजी के साथ बच्ची के बयानों का मजे लेकर मजाक उड़ा रही थी। सच यही है कि आज भी उस घटना को लगभग एक वर्ष बीतने के बाद भी प्रदेश के लगभग सभी थानों में वही पुलिस मानसिकता कायम है। इससे उवरना होगा और पुलिस को ऐसी घटनाओं को तत्काल गंभीरता से लेना होगा। इधर मंत्री और सत्तारुढ़ पार्टी के नेताओं को सामांतवादी मानसिकता से निकलना होगा कि बलात्कार तो इस देश में होते ही रहते हैं इसमें खास क्या है। यदि होते ही रहते हैं तो फिर आपकी क्या जरुरत है जो जनता की कमाई से केवल ऐस कर रहे हैं। समाज को भी चिंतन करना पढ़ेगा क्योंकि ये समस्या हमारी भी है और यह भी याद रखना पड़ेगा कि सत्ता और पुलिस इस मामले में निक्कमें साबित हुये हैं।