गंदगी फैलाने वालों को ‘वंदे मातरम्’ बोलने का हक नहीं: पीएम मोदी

0
130

“प्रधानमंत्री का यह भाषण स्वामी विवेकानंद के शिकागो विश्व धर्म संसद में दिए भाषण के 125 साल पूरे होने और पंडित दीनदयाल उपाध्याय शताब्दी समारोह के मौके पर ‌दिया गया है।”

नरेंद्र मोदी सोमवार सुबह 11 बजे से  देशभर की 40 हजार यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के विद्यार्थिययों को संबोधित कर रहे हैं। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, “विवेकानंद जी ने आइडिया को आइडियलिज्म में कनवर्ट किया। उन्होंने रामकृष्ण मिशन को जन्म दिया, लेकिन विवेकानंद मिशन को जन्म नहीं दिया। क्या कभी किसी ने सोचा कि किसी लेक्चर के 125 वर्ष मनाएं जाएंगे। जब इस भाषण की शताब्दी मनाई गई थी, तब मैं शिकागो में था। पीएम ने कहा कि जब तेज आवाज में वंदे मातरम् सुनो तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। पीएम ने कहा कि क्या हमें वंदे मातरम् कहने का हक है। ये बात लोगों को चोट पहुंचाएगी। मोदी ने कहा कि लोग पान खाकर भारत मां पर पिचकारी मारते हैं और फिर वंदे मातरम् बोलते हैं। बस सफाई का काम करने वालों को वंदेमातरम् बोलने का हक है।”

मोदी ने कहा कि विवेकानंद जी के दो रूप थे, विश्व में वे जहां भी गए बड़े विश्वास के साथ भारत का महिमामंडन करते थे। विवेकानंद हमारे समाज के अंदर की बुराइयों को कोसते थे, और उनके खिलाफ आवाज उठाते थे। वे दुनिया में भारत की तारीफ करते थे, लेकिन भारत में आकर समस्याओं को उठाते थे। वे जीवन में कभी गुरु खोजने को नहीं गए थे, वे सत्य की तलाश में थे। महात्मा गांधी भी जीवन भर सत्य की तलाश में घूमते रहे।

-प्रधानमंत्री का यह भाषण स्वामी विवेकानंद के शिकागो विश्व धर्म संसद में दिए भाषण के 125 साल पूरे होने और पंडित दीनदयाल उपाध्याय शताब्दी समारोह के मौके पर ‌दिया गया है। जिसकी थीम यंग इंडिया-न्यू इंडिया पर केन्द्रित है।

-इसके लाइव टेलिकास्ट के लिए यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) पहले ही सर्कुलर जारी कर चुकी है।

ममता ने जताया विरोध

पश्चिम बंगाल सरकार ने यूजीसी का ऑर्डर मानने से इनकार कर दिया। साथ ही केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था के भगवाकरण का आरोप लगाया। बंगाल के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा, ”केंद्र सरकार का पूरा प्रयास है कि शिक्षा व्यवस्था का ‘भगवाकरण’ कर दिया जाए। राज्य सरकार के आदेश के खिलाफ जाकर हम कॉलेजों में पीएम की स्पीच का लाइव टेलिकास्ट नहीं करा सकते हैं।” ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल की सभी यूनिवर्सिटी और संस्थान से कहा है कि वे 11 सितंबर को पीएम का भाषण टेलिकास्ट करने के लिए यूजीसी का कोई आदेश नहीं मानें।