तीन तलाक पर अध्यादेश, परिवार प्रधानता की जीत

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भारत सरकार ने 1 साल से राज्यसभा में लटके कानूनों पर अध्यादेश लागूकर बता दिया कि देश का आधार परिवार प्रधानता है और इन पारिवारिक रिश्तों को कोई भी अपनी मर्जी के अनुसार तोड़कर किसी का जीवन बर्बाद नहीं कर सकता |

जिस रूढ़ि परंपरा के कारण नारी को भारत में खिलौना बना दिया जाता था | पुरुष अपनी मर्जी से उसे तलाक-तलाक- तलाक बोलकर उसे असाध्य और बेबस बना देता था और अपना रौब बताता था इस पर सरकार ने अध्यादेश लगाकर सरकार ने break लगा दिया है | किसी भी घर के विकास में ना तो नारी की प्रधानता होती है ,ना ही पुरुष की प्रधानता होती है lवह घर स्वर्ग तभी बनता है ,जब उस घर में परिवार की प्रधानता होती है और जहां पर परिवार प्रधान होता है l वहां स्वार्थ समाप्त हो जाता है अहंकार का नामो निशान मिट जाता है | जो घरों को तोड़ता था ऐसी अहंकार की तलवारों को जनता के प्रतिनिधियों ने लोकतंत्र के सदन में तोड़ दिया है और अध्यादेश के रूप में कानूनों को बना दिया है |

इस कानून ने भारतीय परिवारों को संरक्षण दिया है | उन भारतीय नारी को करुण पुकार को सुनकर संकट के समय सरकार उनके साथ आकर में खड़ी हुई है |

ऐसी ही जनहित के कार्य जनता के प्रतिनिधि करते रहे और डेरा में से कुप्रथाओं को समाप्त कर स्वर्णिम भारत का निर्माण हो सकता है .