बाजारों में से दो हजार के नोट गायब, जिम्मेदार कौन?

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बाजारों में से दो हजार के नोट गायब, जिम्मेदार कोन?

श्रीगोपाल गुप्ता

गत दिवश मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के शाजापुर में किसानों की एक सभा को संबोधित करते हुये कहा कि प्रदेश में दो हजार के नोट गायब कर दिये गये हैं! नोट गायब करने के पीछे साजिश की जा रही है, मगर मैं इस साजिश को सफल नहीं होने दूंगा!हालांकि मुख्यमंत्री ने यह नहीं बताया कि यह साजिश कोन लोग कर रहे हैं? और क्यों कर रहे हैं? और किसके ईशारे पर कर रहे हैं? क्या ये साजिश विपक्ष कर रहा है या फिर इसके पीछे कोई प्रदेश विरोधी ताकत अथवा माफिया सक्रिय है? सवाल तो बहुतेरे खड़े होते हैं, क्योंकि तमाम बिंगतियों के बावजूद 14 साल से प्रदेश के तख्त पर काबिज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को गंभीर व्यक्तत्व का धनी माना जाता है! उनसे यह उम्मीद की जाती है कि यदि वे कह रहे हैं तो निश्चित ही बाजारों में से दो हजार के नोट गायब करने की साजिश रची जा रही है, तो सच ही होगी? मगर हकीकत इससे जुदा है, लगातार तीन मर्तबा मप्र की हुकूमत पर कायम रहकर चौथी दफा प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनवाने के लिए चौहान 24 घण्टों में 18-20 घंटे लगातार काम कर रहे हैं! इसमें प्रति दिन लंबे और उबाऊ दौरे, नाराजों को मनाने की मुनिहार बड़ी -बड़ी सभाओं को संबोधित करना और खैरातों का बांटना! और शायद यही वो थकान का कारण है कि मुख्यमंत्री जी को बाजार में से अचानक गायब हुये दो हजार नोटों के पीछे साजिश नजर आ रही है! जबकि हकीकत यह है कि केवल दो हजार के नोट ही नहीं बल्कि बाजारों, एटीम और बैंकों से समूची नगदी ही गायब है! ये स्थिति केवल मध्यप्रदेश की ही नहीं है, बल्कि ये नगदी का संकट देश के चार राज्यो में से बढ़कर लगभग आठ राज्यों को अपनी चपेट में ले चुका है! स्थिति इतनी भयावह और गंभीर हो गई है कि नोटबंदी के डेढ़ साल बाद पुनः एक बार बिना नोटबंदी के नोटबंदी हो गई है! विभिन्न बैंकों के एटीम ने नोट उगलना बंद कर दिया है, बैंक अपने ग्राहकों टहलाने में लगी हैं!साहलग के इस मौसम में हालात इतने खराब और बदतर हो गये हैं कि जिनके यहां बच्चों की शादी है, वे मजबूर किसानों की तरह उस आसमान के पीछे छुपे भगवान को दया करने के लिए निहार रहे हैं! जबकि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इसमें साजिस नजर आ रही है?यह प्रदेश के खुफिया तंत्र के फैलुअर होने की दास्तान भी है!

नगदी के संकट से जूझ रहे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पांच दिवसिय दौरे पर विदेश भ्रमण पर हैं जबकि केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली बीमारी के कारण विस्तर पर हैं! देश में नगदी के संकट की उठती हा-हाकार के बीच मोर्चा केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने संभाला है! उन्होने बताया कि हमारे पास सवा लाख करोड़ रुपयों की करैंसी मौजुद है, देश में नगदी का संकट नहीं होने देंगे! अचानक देश के आठ राज्यों में आये नगदी के संकट के लिये शुक्ला जी ने कहा कि कुछ राज्यों में पैसा ज्यादा हो गया है तो कुछ राज्यों में कम!थोड़ी कैस सप्लाई के सिस्टम भी गढ़बड़ी हो गई थी! मगर इसमें कोई दिक्कत नहीं है, हमने रिजर्व बैंक के साथ मिलकर राज्यवार कमेटी बना दी हैं, दो-तीन दिन में लोगों को संकट से निजात मिल जायेगी! नगदी के संकट से जूझ रहे गुजरात के उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल का कहना है कि उन्होने तीन दिन पहले ही रिजर्व बैंक आँफ इंडिया को इस बारे में बता दिया था, मगर अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है! इधर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी आज मंत्री मंडल की आपात बैठक बुलाकर कैस की कमी का सामना कर रहे प्रदेश के हालातों से वित्त मंत्री अरुण जेटली को अवगत करा दिया है! अरुण जेटली ने भी ट्यूटर हैंडल से ट्यूट करते हुये कहा कि देश में कैस की कोई कमी नहीं है, बैंकों में पैसा भरा पड़ा है! मगर वे आम जनता को दे क्यों नहीं रही और एटीम क्यों खाली पड़े हैं! इस पर कहा जा रहा है कि अचानक कुछ राज्यों में नगदी की ज्यादा मांग आ गई थी और कैस सप्लाई में दिक्कत हो गई थी, उसे ठीक कर लिया गया है! इधर कैस की कमी से सबसे ज्यादा हलकान बिहार में इस सियासत शुरु हो गई है! बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मोदी सरकार पर निशाना साधा कि बैंक और एटीएम में पैसा नहीं है!नोटबंदी के बाद यह सबसे बड़ा घोटाला है,अगर इस मामले की जांच कराई जाये तो क्ई बड़े लोग फंस जायेंगे! उधर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी देश में पैदा हुये नगदी के संकट पर केन्द्र की मोदी सरकार को घेरने का काम शुरु कर दिया है! गांधी का कहना है कि नीरव मोदी और मेहूल चोक्सी जिन्हें प्रधानमंत्री मोदी नाम से पुकारते थे, वे बैंक का पैसा लेकर विदेश भाग गये! ऐसे में जब देश में नगदी का संकट खड़ा हो गया है और उसमें मध्यप्रदेश भी शामिल है!मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इसमें किसी की साजिश को ढूंड़ने और सफल नहीं होने की बात छोड़कर संकट के हल की और गंभीरता से प्रयास करने चाहिए!इसके लिये विभिन्न बैंकों के आचरण पर ध्यान देने की जरुरत है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना नोटबंदी को सबसे ज्यादा पलीता इन बैंकों और बैंकों में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारियों ने ही लगाया था!