सर्वपित्र अमावस्या पर चिड़ियाघर मे अनोखा आयोजन…

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संस्था करुणा सागर के सदस्य साधुसंतों के साथ पंहुचे चिड़ियाघर।
पवन मकवाना 9827360360

संत एवं पशु पक्षी प्रेमी चिड़ियाघर पहॅुचे

सेंवफल, केले, चीकू, अंगुर और अनार लेकर।

इन्दौर। यूं तो लोग चिड़ियाघर जाते हैं बच्चों को जंगल में रहने वाले जानवरों से परिचित कराने और मनोरंजन करने लेकिन आज सुबह चिड़ियाघर का नजारा ही कुछ और था। वैसे तो हमारे हिन्दू धर्म में सर्वपित्र अमावस्या पर अपने पित्रों की याद में ब्रम्हभोज या काग भोज कराने का विधान है और यह परंपरा अनादीकाल से चली आ रही है लेकिन इस परंपरा से हटकर संस्था करूणा सागर ने इस बार कुछ हटकर करने की ठानी और केले, अमरूद, संतरे, आम, जाम, सेंवफल, चीकू, चना, ज्वार, गेंहू, अनाज व हरी घांस लेकर जा पॅहुचे हमारे शहर के चिड़ियाघर में और साधू संतो के द्वारा किए जा रहे मंत्रोच्चार के साथ वहाॅ रह रहे जानवरों को फल व सब्जियां खिलाने लगे। जब संस्था से पूछा गया की यह सब क्यूॅ तो संस्था के राजू सागर ने बताया की हमारे देश में तीज त्यौहार किसी ना किसी उद्देश्य को लेकर बनाए गए हैं जिनका हम लोगों के जीवन में कुछ ना कुछ महत्व है, वैसे ही सर्वपित्र अमावस्या को अपने पित्र पूजन व पित्र भोज कराने का महत्व है, हमे इस प्रकृति को भी अपना माता पिता तुल्य समझना चाहिए और इस प्रकृति में वन्य जीव जंतु भी आते हैं जिनकी तरफ किसी का ध्यान नही जाता है। इसलिए हमने निश्चय किया की सर्वपित्र अमावस को क्यों ना हमारे द्वारा इन मुक वन्य जीव जंतुओं को भोजन कराया जाए।

बस इसी उद्देश्य को लेकर हम यहाॅ फल लेकर आये हैं।

 वहीं संस्था के साथ आए संत महामंडलेश्वर लक्ष्मणदास महाराज ने बताया की हमारे धर्मानुसार मृत्यु के बाद हमारे पूर्वज अनोकोंनेक योनियों में जन्म लेते हैं व इस संसार में भ्रमण करते हैं कौन किस रूप में फिर इस संसार में आता है यह कोई नहीं जानता संस्था करूणा सागर के राजू सागर ने जब मुझे इस आयोजन के बारे में बताया तो मै खुद को इस पुनित कार्य के लिए रोक नहीं पाया और यहां इन मुक जानवरों को भोजन कराने अपने शिष्यों व अन्य साधू संतो के साथ आया हूॅ और शहर की जनता से कहना चाहता हूॅ की वै भी राजू सागर के विचारों से प्रेरणा लें और ऐसे पुनित कार्य मूक जीवों के लिए करें और पूण्य कमाऐं। राजू सागर पूर्व में भी मूक जानवरो पशु पक्षियों के लिए काम करते रहे हैं, जैसे बीमार शेर के स्वास्थ्य के लिए हवन पूजन, पशु पक्षियों के लिए पेड़ों पर घर बनाना, प्यासे पंक्षियों के लिए गर्मियों में मिट्टी के सकोरे वितरित करना, हाथी के लिए पैरों के जूते बनवाने जैसे अनेकों कार्य संस्था करूणा सागर के राजू सागर द्वारा किए गये हैं।