अदम्य गणेश उत्सव… भक्ति के साथ बच्चों का ख्याल

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इन्दौर। वैशाली नगर स्थित अदम्य गणेश उत्सव पंडाल में प्रवेश करते ही सामने बने मंदिर में 14 फिट की मिट्टी से बनी श्रीगणेश की विशाल प्रतिमा नजर आती है जिसे इन्दौर के ही बंगाली कारीगरों ने बनाया है।

 

मंडल के युवराज दुबे ने बताया की यहां गणेश उत्सव की शुरूआत करीब 28 वर्ष पूर्व कालोनी के बुजुर्गों के द्वारा शुरूआत की गई थी। परंपरा को सतत् जारी रखते हुवे हम सभी युवा साथी 14 वर्षों से इस पुनित कार्य को सफलता पूर्वक संचालित कर रहे हैं। गणेश उत्सव के लिए किसी से सहयोग राशी नहीं ली जाती है। श्रद्धालु अपने सामर्थ व स्वच्छा से मंडल को सहयोग राशी दे जाते हैं। गणेश उत्सव में बुजुर्गों के लिए भक्ति संगीत प्रतियोगिता, महिलाओं के लिए तंबोला, रंगोली सजाओ प्रतियोगिता, आरती की थाली सजाओ आदि प्रतियोगिताऐं तो रखी जाती ही हैं युवाओं के लिए मटकी फोड़, फैंसी ड्रेस, क्वीज काॅम्पीटीशन रखी जाती है।

 

 

अदम्य के पंडाल में एक खास बात और है कि यंहा 2 से 5 वर्ष तक बच्चे जो कि कीसी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सकते उनके मनोरंजन लिए मंडल विशेष तौर पर छोटे झूले, जंपीग पेड, मिकी माउस व अन्य प्रकार के साधन पंडाल में बच्चों के लिए लगाए जाते हैं। यानी की हर वर्ग विशेष के लिए अदम्य पंडाल में व्यवस्था की गई है।

और एक खास बात यह है की इस पंडाल में आने वाला कोई भी श्रद्धालु भुखे पेट वापस नहीं जाता क्योंकि यहां प्रसाद के रूप में हर दिन दाल-बाफले, इडली सांभर, हलवा-पूरी, खीर-पूरी, सब्जी-पूरी व तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं। यानि की अदम्य गणेश उत्सव एक ऐसा पंडाल है जॅहा सब के लिए कुछ ना कुछ है।

अदम्य गणेश उत्सव एक ऐसा पंडाल है जॅहा सब के लिए कुछ ना कुछ है।