वाह… गुड़ खाना और गुलगुलों से परहेज करना

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वाह… गुड़ खाना और गुलगुलों से परहेज करना

श्रीगोपाल गुप्ता

भारतीय जनता पार्टी नीत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सत्ता में आने के बाद वास्तव में क्ई काम पहली मर्तबा ही हुये हैं!इनमें नोटीबंदी, जीएसटी थोपना और अब देश की आजादी के बाद पहली मर्तबा उसी पाकिस्तान की सैना के साथ मिलकर आंतकवाद के खिलाफ संयुक्त युद्धाभ्यास करना! नोटबंदी और जीएसटी कितनी सफल रही या अफसल, ये विशुद्ध रूप से देश का आंतरिक मामला है! मगर पाकिस्तान जिसे समस्त विश्व बिरादरी में आंतकवादी और आंतकवाद का जनक घोषित कराने में क्ई दशकों में हमारी क्ई पीढ़ियां मर खप गई!उसके साथ संयुक्त युद्धाभ्यास वो भी आंतकवाद के सफाये के नाम पर, निश्चित प्रत्येक भारतीय को सुनकर आश्चर्य हो रहा होगा,मगर हमारी सरकार ऐसा करने जा रही है! खबरों के मुताबिक भारत और पाकिस्तान के बीच भयंकर तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद आजादी के बाद पहली मर्तबा जल्द ही दोनों देशों की सेनाएं एक साथ युद्धाभ्यास करेंगी! दोनों देशों की सेनाएं इसी साल सितंबर में बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेंगी !यह सैन्य अभ्यास रुस के उराल पर्वतीय क्षेत्र में चीन के नेतृत्व वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की रुपरेखा के तहत किया जायेगा, जिसका उद्देश्य आंतकवाद पर लगाम लगाना है ?इस संगठन के भारत और पाकिस्तान पिछले वर्ष ही सदस्य बने हैं! चूंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की दो दिवसिय चीन यात्रा कल ही समाप्त हुई है! इससे पहले रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन भी चीन के दौरे पर थीं! समझा जाता है कि चीन के दबाव में उनके ही आदेश पर भारत सरकार उक्त कदम उठाने जा रही है! मगर ये आश्चर्यजनक होकर अकल्पनीय है! यह पूरा विश्व जानता है कि पाकिस्तान और चीन ऐसे दो भारत के पड़ौसी देश हैं जो भारत को कभी भी आगे बढ़ते खुशहाल होते देखना नहीं चाहते!

जम्मू -काश्मीर की मुख्यमंत्री और अपनी पार्टनर मुफ्ती मेहबूबा के विधानसभा में प्रस्ताव पारीत कराने के बावजूद और अनेक सियासतदानों के बार-बार कहने के बाद भी नरेन्द्र मोदी सरकार पाकिस्तान से बात करने के लिए तैयार नहीं है!सरकार का इस मसले पर कहना उचित है कि आंतकवाद के साथ -साथ बातचीत करना संभव नहीं है! ऐसा नहीं है कि कि मोदी जी ने पाकिस्तान से संबंध सुधारने की कोशिश नहीं की! अपने प्रधानमंत्री बनने के फ़ौरन बाद प्रधानमंत्री जी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ को आमंत्रण देकर दोनों देशों के बीच सुलह की कोशिश की शुरुआत की थी! इतना ही नहीं सह्रदयता का परिचय देते हुये बाद में नरेन्द्र मोदी अफगानिस्तान से भारत वापिस आते समय अचानक नवाज शरीफ के बिन बुलाये मेहमान भी बने! मगर दोस्ती गढ़ने की सारी कबायद जाया ही गई ! इस सौहार्द के बदले देश को बड़े-बड़े आंतकी हमलों से सारोकार होना पढ़ा और अपने बैस कीमती जवानों की शहादत भी देनी पड़ी जो बहुत दुःखद था!इसके बाद आंतकवाद और बातचीत साथ-साथ न करने के मोदी सरकार के फैसले का देश ने स्वागत किया और स्वीकार किया था! मगर अब ऐसी क्या मजबूरी आ गई कि जिसने हमको लहूलुहान कर घायल कर दिया और हम ईलाज के लिए भी उसी के दर पर खड़े होकर दवा लेने के लिए मजबूर हो गये? हमने पूरी विश्व बिरादरी को आंतकवाद के सबूत देकर पाकिस्तान को आंतकवादी देश घोषित कराने के प्रयास किये और उसमें भी काफी हद तक हम सफल भी हुये हैं! पूरा विश्व गवाह है कि पाकिस्तान के जन्म से लेकर आज तक भारत ने पाकिस्तान की दोगली नीतियों के कारण बहुत से जख्म खाये हैं!अपने हजारों जवानों की शहादत देनी पड़ी है और दे रहे हैं! आज उसी आंतकवाद के पोषक आंतकवादी देश पाकिस्तान की सेना के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास की तैयारी, उस पर भी तुर्रा यह है कि ऐसा इसलिए कि कि इससे दोनों देशों की सेना आंतकवाद का कड़ा मुकाबला कर सकेंगी?या फिर पाकिस्तान की सेना हमारे गुर सीखकर हमारे ही सेनिकों को मौत के घाट उतारने का खेल खेलेगी? अजब स्थिति में देश खड़ा है, पहले पाकिस्तान के साथ प्यार मुहब्बत का इजहार फिर बातचीत से भी इनकार और अब संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास! वाह.. क्या विदेश नीति है? अपनों की बात को दरकिनार करना मगर उसी चीन के आदेश को तहजीज देना जिसने सन् 1962 में हमारे एक बड़े भू -भाग पर कब्जा कर लिया और जब -तब हमको आंखे दिखाता है! उसकी बात पर संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास, मतलब गुड़ खाना और बुलबुलों से परहेज करना!