वॉयेज कैफेटेरिया में ‘योर कोट‘ इंदौर के ओपन माइक से गुलजार हुआ रविवार

0
469
इंदौर में युवाओं को मंच देने के लिए ‘योर कोट‘ द्वारा रविवार को Voyage Cafeteria में  ओपन माइक का आयोेजन किया गया। इस कार्यक्रम में इंदौर के युवा प्रतिभागियों ने अपनी  काव्य रचनाए प्रस्तुत की। कार्यक्रम में 30 से अधिक युवाओं ने अपने ख्याल नज़्म, ग़ज़ल, अशआर और कविताओं के रुप में प्रस्तुत किए।
आयोजन के माध्यम से युवाओं को एक मंच देने की कोशिश संस्था ‘योर कोट‘ ने की, जिसमें कई बेहतरीन प्रतिभाओं को श्रोताओं ने सुना। कार्यक्रम का संयोजन अवधेश शर्मा एवं आयुषी द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में  कई स्थापित लेखकों और कवियों के साथ नए लेखकों ने भी श्रोताओं को मुग्ध किया। प्रतिभागी अभिषेक नेमा ने ‘बन्दे में दमहै तो निकलेगा चंगा’ हास्य रचना पढ़ी। निलेश कुशवाह ने युवाओं को नज्ऱ करते हुए एक गज़ल “हमारे ख्वाब मरते जा रहे थे, सो हम आंखें बदलते जा रहे थे।” कार्यक्रम में पेश  की। अवधेश शर्मा‘ध्रुव‘ ने ‘गिफ्ट वैलेंटाइन डे का’ हास्य रचना पढ़ी, जिस पर सबकी दाद मिली। वहीं आला चैहान ‘मुसाफिर‘ ने मुहब्बत पर अपनी नज़्म से लोगों को बांधने की कोशिश की। मयंक दादू ‘कायनात’ ने अपनी नज़्म ‘”मेरे साथ अक्सर ऐसा हो जाता है” पढ़ी और राहुल तिवारी ने “गर सुन सकती है तो सुन, के माध्यम से हिज़्र का ख्याल पेश किया।” मनीषा जोशी ने अंग्रेजी कविता ‘आई ऍम लाइक अदर गर्ल्स’ पढ़ी। आयुषी छिरौल्या ने ‘मैं इंतज़ार तुम्हारा आज भी करती हूँ’ पढ़कर वियोग श्रृंगार का नमूना पेश किया।
कार्यक्रम में कई काॅलेज के विद्यार्थियों ने भी अपनी लेखन कला का प्रदर्शन  किया। कार्यक्रम का संचालन मयंका दादू ‘कायनात‘ ने किया। आभार आयुशी दौनेरिया ने माना। अन्य कवियों में रविराज, मनीष, यश, दीपक, नितीश, अंकुर, ऋषि राज, योगेश, हर्ष, राजेश, नटवर, अदनान, ऋषभ, लोकेश, प्रिंस राय, विद्या बोकाडिया, वैदेही थे।
यॉरकोट एक एप्प है जो कवियों को अपनी रचनाये पिक्चर के साथ लिखने का मौका देता है और हर शहर में इस तरह के आयोजन स्थानीय लेखकों द्वारा किये जाते है। रिकॉर्ड की हुए परफॉरमेंस यॉरकोट के यूट्यूब चैनल पर अपलोड की जाती है। ओपन माइक का उद्देश्य नए लेखकों को एक मंच प्रदान करना है। कार्यक्रम के लिए रजिस्ट्रेशन निशुल्क रहता है और जरुरी संसाधन सब आपस में मिल कर ही जुटाते है।”